AI और एंटी-ड्रोन सिस्टम से लैस होंगे 'स्मार्ट बॉर्डर'; अमित शाह ने बताया सिक्योरिटी ग्रिड का प्लान

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार "स्मार्ट बॉर्डर" की अवधारणा पर काम कर रही है. इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल सर्विलांस, एंटी-ड्रोन सिस्टम, स्मार्ट सेंसर और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का इस्तेमाल किया जाएगा.

Jul 11, 2026 - 14:42
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AI और एंटी-ड्रोन सिस्टम से लैस होंगे 'स्मार्ट बॉर्डर'; अमित शाह ने बताया सिक्योरिटी ग्रिड का प्लान
Amit Shah

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमा सुरक्षा को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया जाएगा. सरकार स्मार्ट बॉर्डर, एआई निगरानी और यूनिफाइड सुरक्षा ग्रिड के जरिए घुसपैठ, ड्रोन और ड्रग्स की तस्करी पर सख्ती से रोक लगाएगी. अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार देश की सीमा सुरक्षा को पूरी तरह आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. नई दिल्ली में आयोजित बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट सुपरिंटेंडेंट्स ऑफ पुलिस कॉन्फ्रेंस-2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब सीमा सुरक्षा सिर्फ सीमा पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय लोगों के साझा प्रयास से मजबूत सुरक्षा तंत्र तैयार किया जाएगा.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार "स्मार्ट बॉर्डर" की अवधारणा पर काम कर रही है. इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल सर्विलांस, एंटी-ड्रोन सिस्टम, स्मार्ट सेंसर और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का इस्तेमाल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत की सीमा प्रबंधन प्रणाली को दुनिया की सबसे आधुनिक व्यवस्थाओं में शामिल करने का लक्ष्य है. गृह मंत्री ने बताया कि सरकार "क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी ग्रिड" विकसित कर रही है, जिससे सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा होगी और किसी भी खतरे पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी. उन्होंने कहा कि सरकार अब घटनाओं के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से खतरे की पहचान कर उसे रोकने की रणनीति पर काम कर रही है.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार की सीमा सुरक्षा नीति तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिसमें "सुरक्षित सीमाएं, समृद्ध सीमांत क्षेत्र और जागरूक समाज शामिल है." उनका कहना था कि सीमा क्षेत्रों में सड़क, पुल, सुरंग, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि पलायन रुके और स्थानीय लोग भी सीमा सुरक्षा में भागीदार बनें. गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ पर निर्णायक कार्रवाई करना है. इसके लिए अगले तीन वर्षों की व्यापक रणनीति तैयार की गई है. अमित शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ घुसपैठियों की पहचान करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जिससे अवैध घुसपैठ पूरी तरह रोकी जा सके.

बुनियादी सुविधाओं में 400% बढ़ा निवेश: गृह मंत्री ने यह भी बताया कि मोदी सरकार के दौरान सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे पर निवेश में करीब 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के जरिए सीमावर्ती गांवों में रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत-म्यांमार सीमा पर लगभग 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग का काम भी तेजी से चल रहा है. करीब 31,000 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना पूर्वोत्तर में अवैध घुसपैठ, हथियारों और ड्रग्स की तस्करी, कट्टरपंथ और संगठित अपराध पर लगाम लगाने में अहम भूमिका निभाएगी.

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