Onam Festival 2026: ओणम का धार्मिक महत्व, इतिहास और 10 दिनों के उत्सव की पूरी विधि; जानिए क्यों, कहां और कैसे मनाया जाता है केरल का यह महापर्व

केरल के सबसे बड़े और भव्य सांस्कृतिक महापर्व 'ओणम' (Onam) का उत्सव पूरे देश और दुनिया में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मलयालम सौर कैलेंडर के पहले महीने 'चिंगम' में 10 दिनों तक चलने वाला यह फसल उत्सव राजा महाबली की अपनी प्रिय प्रजा से मिलने की वार्षिक घर वापसी की खुशी में आयोजित किया जाता है। जानिए ओणम के धार्मिक इतिहास, 10 दिनों के अनुष्ठानों और इसे मनाने के पारंपरिक तौर-तरीकों से जुड़ी पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Aug 26, 2026 - 12:01
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Onam Festival 2026: ओणम का धार्मिक महत्व, इतिहास और 10 दिनों के उत्सव की पूरी विधि; जानिए क्यों, कहां और कैसे मनाया जाता है केरल का यह महापर्व

तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: दक्षिण भारत के सबसे जीवंत, रंगारंग और समृद्ध सांस्कृतिक उत्सवों में ओणम (Onam) का स्थान सर्वोपरि है। मलयालम सौर कैलेंडर के पहले महीने 'चिंगम' (Chingam) में मनाया जाने वाला यह दस दिवसीय महापर्व नई फसल के आगमन की खुशी और सामाजिक समरसता का प्रतीक है।

ओणम केवल एक क्षेत्रीय त्योहार नहीं, बल्कि यह केरल की सांस्कृतिक अस्मिता, लोक कलाओं, समृद्ध खानपान और परस्पर प्रेम की पहचान है।

1. ओणम क्यों मनाया जाता है? (पौराणिक इतिहास व कारण)

ओणम के मनाए जाने के पीछे दो मुख्य पौराणिक और कृषि-आधारित कारण हैं:

  1. राजा महाबली (मावेली) की वापसी:

    • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में केरल में असुर राजा महाबली का शासन था। उनके राज्य में न्याय, समानता, सत्य और अपार संपन्नता थी, जहाँ कोई छल-कपट या गरीबी नहीं थी।

    • देवताओं की चिंता पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और महाबली से तीन पग भूमि का दान मांगा। पहले दो पगों में पृथ्वी और स्वर्ग नापने के बाद, जब तीसरा पग रखने की जगह नहीं बची, तो महाबली ने विनम्रता से अपना सिर आगे कर दिया।

    • महाबली की भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का स्वामी बनाया और वरदान दिया कि वे वर्ष में एक बार अपनी प्रिय प्रजा से मिलने धरती पर आ सकेंगे। उसी पावन मिलन की स्मृति में ओणम मनाया जाता है।

  2. फसल कटाई का उत्सव (Harvest Festival):

    • बरसात के बाद जब धान की नई फसल तैयार होती है और खेतों में हरियाली छा जाती है, तब किसान ईश्वर और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए ओणम का उत्सव मनाते हैं।

2. ओणम कहां मनाया जाता है? (भौगोलिक विस्तार)

  • केरल का राज्य उत्सव: यह केरल का आधिकारिक राजकीय पर्व है, जहां सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर सप्ताह भर की छुट्टियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

  • वैश्विक मलयाली समुदाय: भारत के विभिन्न महानगरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई) सहित खाड़ी देशों (UAE, कतर, सऊदी अरब), ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा में बसे प्रवासी मलयाली इसे बड़े स्तर पर मनाते हैं।

3. ओणम कैसे मनाया जाता है? (10 दिवसीय अनुष्ठान व मुख्य रंग)

ओणम का पर्व 10 दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत 'अथम' (Atham) के दिन होती है और समापन 10वें दिन 'तिरुओणम' (Thiruvonam) के रूप में भव्यता के साथ होता है:

  • पूकलम (Pookkalam - फूलों की रंगोली): पहले दिन से लेकर दसवें दिन तक घरों के प्रवेश द्वार पर ताजे और सुगंधित फूलों की गोलाकार रंगोली बनाई जाती है। हर दिन इसमें फूलों की एक नई परत जोड़ी जाती है, जो राजा महाबली के भव्य स्वागत की तैयारी को दर्शाती है।

  • ओणम सद्या (Onam Sadya - 26 व्यंजनों का महाभोज): तिरुओणम के दिन केले के पत्ते पर परोसी जाने वाली 26 से अधिक विशुद्ध शाकाहारी व्यंजनों की दावत ओणम का सबसे मुख्य आकर्षण है। इसमें अवियल, सांभर, थोरन, ओलन, कालान, रसम, पचड़ी, पुलिइंजी, केले के चिप्स और मीठा पायसम (खीर) शामिल होते हैं।

  • वल्लम कली (Vallam Kali - सर्प नौका दौड़): पम्पा नदी और बैकवाटर्स में सैकड़ों मल्लाहों द्वारा एक लय में पारंपरिक गीत ('वंजीपाट्टू') गाते हुए लंबी नौकाओं को दौड़ाया जाता है, जिसमें नेहरू ट्रॉफी बोट रेस और आरनमुला बोट रेस सबसे प्रसिद्ध हैं।

  • पारंपरिक लोक नृत्य: शरीर पर बाघ की पेंटिंग बनाकर किया जाने वाला ऊर्जावान 'पुलिकली' (बाघ नृत्य), शास्त्रीय कत्थकली और महिलाओं द्वारा सफेद व सुनहरी किनारी वाली कासावु साड़ियों में किया जाने वाला 'थिरुवाथिरा कली' नृत्य इस पर्व की शान हैं।

4. ओणम का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

  • जाति और धर्म से परे एकता: ओणम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किसी एक धर्म के दायरे में नहीं बांधा जाता। केरल में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय मिलकर इस सांस्कृतिक पर्व का जश्न मनाते हैं।

  • समानता का संदेश: यह पर्व एक ऐसे समाज की कल्पना को जीवित रखता है जहां सभी नागरिक समान, समृद्ध और न्यायप्रिय हों।

  • प्रकृति के साथ तालमेल: ताजे फूल, केले के पत्ते पर भोजन और नदियों में नौका दौड़ प्रकृति के साथ मनुष्य के गहरे संबंध को रेखांकित करते हैं।

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