Sports News: तीन साल बाद पुराने अंदाज़ में बुमराह ने की वनडे में वापसी
- 2023 विश्व कप फ़ाइनल के बाद बुमराह पहली बार वनडे खेल रहे थे, लेकिन ऐसा लग ही नहीं रहा था
Sports News: जसप्रीत बुमराह ने एजबेस्टन में वही किया, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। बुमराह के लिए यह एक और सामान्य दिन था और उनके लिए सामान्य दिन का मतलब अक्सर शानदार दिन होता है। लेकिन मंगलवार का दिन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज़ गेंदबाज़ के लिए और भी ख़ास था। बुमराह ने 50 ओवर के प्रारूप में आख़िरी बार 2023 वनडे विश्व कप फ़ाइनल में खेला था। उसके बाद भारत ने 26 वनडे खेले, लेकिन बुमराह उसमें से एक का भी हिस्सा नहीं रहे। पिछले तीन वर्षों में दो T20 विश्व कप होने के कारण बुमराह को सबसे छोटे प्रारूप के लिए बचाकर रखा गया। इसी रणनीति ने भारत को लगातार दो T20 विश्व कप जीतने वाली पहली टीम बनने में बड़ी भूमिका निभाई।
सोमवार को भारत के कप्तान शुभमन गिल ने भी माना था कि पूरी टीम इस सवाल के जवाब का इंतजार कर रही है कि बुमराह कैसा प्रदर्शन करेंगे? वैसे भी बुमराह को किसी भी प्रारूप में गेंदबाज़ी करते देखना अपने आप में रोमांचक होता है। उनकी लगभग हर गेंद कुछ अलग कहानी कहती है।
बुमराह को इतना ख़ास बनाने वाली बात यह भी है कि वह अपनी योजना ज़्यादा छिपाते नहीं हैं। बल्लेबाज़ ही नहीं, अगर आपने भी उन्हें कई वर्षों से खेलते देखा है तो आप भी उनकी गेंदबाज़ी की लय और तरीका समझ सकते हैं। एजबेस्टन की पिच पर अच्छी नमी थी, इसलिए उन्होंने शुरुआत से ही बेन डकेट को निशाना बनाया। टेस्ट क्रिकेट में भी बुमराह का सामना कर चुके डकेट जानते थे कि क्या आने वाला है- पहले गुड लेंथ पर बाहर निकलती गेंदें और फिर अचानक उसी ऐक्शन से अंदर आती तेज़ गेंद, जो बल्लेबाज़ को पूरी तरह चौंका देती है।
यह इनस्विंगर पांचवीं गेंद पर आई। ओवर द विकेट से गेंदबाज़ी करते हुए बुमराह ने फ़ुल लेंथ की स्विंग होती गेंद डाली, जो डकेट की पिछली एड़ी से टकराई और उन्हें पूरी तरह असंतुलित कर गई। बुमराह ने ज़ोरदार अपील की, लेकिन उन्हें ख़ुद भी पता था कि गेंद लेग स्टंप के बाहर पिच हुई है।
बुमराह को अच्छी तरह समझने वाले स्टुअर्ट ब्रॉड ने कॉमेंट्री के दौरान कहा कि बुमराह की इनस्विंगर बाहर जाती गेंद की तुलना में कहीं ज्यादा तेज़ी से अंदर आती है। यही वे बारीकियां हैं, जिनकी वजह से बुमराह बल्लेबाज़ों को परेशान और दर्शकों को सीट से बांधे रखते हैं।
कुछ ही देर में बुमराह फिर अपनी सर्वश्रेष्ठ लय में लौट आए। चेहरे पर वही हल्की मुस्कान थी और सामने बल्लेबाज़ पूरी तरह बेबस दिख रहा था। अपने दूसरे ओवर में उन्होंने डकेट के बाएं हाथ की तर्जनी पर गेंद मारी, जिसका इस्तेमाल वह टेस्ट क्रिकेट में अक्सर करते हैं- गुड लेंथ पर पड़कर अचानक उछलने वाली गेंद। जुझारू खिलाड़ी डकेट दर्द छिपा नहीं सके और उन्हें दो बार फ़िज़ियो को बुलाना पड़ा।
बुमराह ने अपने पहले स्पेल में चार ओवर फेंके, लेकिन उनके बनाए दबाव ने डकेट और जैकब बेथेल को पूरी तरह बांध दिया। बाद में दोनों ने दबाव तोड़ने की कोशिश की, लेकिन 61 रन की साझेदारी के बावजूद बुमराह द्वारा बनाया गया दबाव युवा गुरनूर बराड़ के काम आया और वह ख़ुशी से झूम उठे।
इसके बाद बुमराह के जादुई हाथों ने उन्हें दिन का पहला विकेट दिलाया, जो वनडे में उनका 150वां विकेट भी था। शिकार बने शानदार फ़ॉर्म में चल रहे हैरी ब्रूक। 79 मील प्रति घंटा (127 किमी प्रति घंटा) की रफ़्तार कागज़ पर बहुत तेज़ नहीं मानी जाती। ब्रूक इससे कहीं ज़्यादा तेज़ गेंदों को दुनिया के सबसे तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ आसानी से बाउंड्री के पार भेज चुके हैं। लेकिन बुमराह इतनी रफ़्तार पर भी कमाल कर सकते हैं। गुड लेंथ पर पड़ने वाली गेंद ने बैकस्पिन के कारण अतिरिक्त उछाल लिया। ब्रूक चौंक गए, बल्ले का किनारा लगा और पहली स्लिप में आसान कैच चला गया। ब्रूक के चेहरे की हैरानी ही पूरी कहानी बयान कर रही थी।
कुछ घंटे बाद मैच के बाद प्रेस वार्ता में जब ब्रूक से उस गेंद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा, "वह अच्छी गेंद थी और मेरा किनारा लग गया।" बुमराह जानते हैं कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों का आत्मविश्वास कैसे तोड़ा जाता है।
नौ ओवर में बुमराह को सिर्फ़ यही एक विकेट मिला, लेकिन तीन अलग-अलग स्पेल में उन्होंने जो असर छोड़ा, वही इंग्लैंड के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी। याद रहे, यह लगभग दो महीने बाद उनका पहला मुक़ाबला भी था। उन्होंने आख़िरी बार 20 मई को IPL लीग चरण का अपना अंतिम मैच में खेला था। अपने बनाए ऊंचे मानकों के हिसाब से IPL 2026 उनका सबसे कमज़ोर सीज़न रहा, जिसमें उन्हें सिर्फ़ चार विकेट मिले। वह अपनी लय नहीं पकड़ सके और पहली बार बुमराह भी आम गेंदबाज़ जैसे दिख रहे थे।
लेकिन इस ब्रेक ने उन्हें फ़ायदा पहुंचाया। वह तरोताज़ा होकर लौटे और उनकी कुशलता में कोई कमी नहीं आई। एजबेस्टन में उनकी 54 गेंदों में से 29 गेंदें 6 से 8 मीटर की लेंथ पर पड़ीं, यानी 53 प्रतिशत से भी ज्यादा। यह आंकड़ा बुमराह के अपने मानकों से भी काफी ऊंचा है। यही वह लेंथ है, जहां बल्लेबाज़ों के लिए रन बनाना मुश्किल होता है और दबाव में गलती होने की संभावना बढ़ जाती है।
सवाल यही है कि बुमराह आते ही ऐसा जादू कैसे कर देते हैं? यह कहा जा सकता है कि वह क्रिकेट से पूरी तरह दूर नहीं थे। यह बात सही है, लेकिन वह वनडे नहीं खेल रहे थे, जहां लय, योजना और गेंदबाज़ी की मांग T20 से अलग होती है।
एजबेस्टन में बुमराह ने दिखा दिया कि उन्हें अब भी इस प्रारूप में अपनी भूमिका निभाना अच्छी तरह आता है। और सवाल अब भी वही है- बल्लेबाज़ जानते हैं कि बुमराह क्या करने वाले हैं, फिर भी वह हर बार उन्हें और हम सभी को हैरान कैसे कर देते हैं?
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