अधिकारियों की सोच वही हो जो सरकार चाहती है: कुलाधिपति
- स्कूटी योजना का उदाहरण देकर कहा, सरकार की मंशा के अनुरूप बनें नियम.
- राज्यपाल ने कृषि में नवाचार और फसल विविधीकरण पर भी दिया जोर.
मेरठ। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मोदीपुरम के 19वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने अधिकारियों को सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि कई बार सरकार की सोच और उद्देश्य कुछ और होते हैं, लेकिन अधिकारी ऐसे नियम बना देते हैं जो सरकार की मंशा के अनुरूप नहीं होते। इसलिए अधिकारियों की सोच भी वही होनी चाहिए जो सरकार चाहती है।
दीक्षांत भाषण में कुलाधिपति ने प्रदेश सरकार की स्कूटी योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि योजना के लिए पहले 90 से 95 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाली इंटर पास छात्राओं को ही पात्र बनाया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गांव की कोई सामान्य बेटी इतने अधिक अंक लाकर इस योजना का लाभ ले पाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे नियमों का लाभ अधिकतर अधिकारियों के परिवारों की बेटियों को ही मिलता। इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से बात कर नियमों में संशोधन कराने को कहा। उन्होंने कहा कि सरकार ने योजना के लिए पर्याप्त बजट दिया था, लेकिन नियम बनाने में अधिकारियों ने चूक कर दी।
कुलाधिपति ने कृषि क्षेत्र में बदलाव की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गुजरात में केवल नर्मदा जैसी एक प्रमुख नदी है, जबकि उत्तर प्रदेश में अनेक बारहमासी नदियां हैं। इसके बावजूद प्रदेश में गन्ने की खेती पर अत्यधिक निर्भरता है। उन्होंने किसानों और कृषि वैज्ञानिकों से फसल विविधीकरण अपनाने तथा गुणवत्तायुक्त आलू बीज उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अपील की।
उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच और नवाचार को कृषि से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक कार्य 'देश प्रथम' की भावना से किया जाना चाहिए। माता-पिता के अनुभवों का सम्मान करें और अपने ज्ञान का उपयोग गांव, किसान तथा महिलाओं के उत्थान के लिए करें। उन्होंने कहा कि कृषि में नई तकनीक और नवाचार ही भविष्य की चुनौतियों का समाधान बनेंगे।
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