Lucknow coaching center fire Case: लखनऊ हादसे में एलडीए की जांच में बड़ा खुलासा!

लखनऊ अग्निकांड में कई तरह की लापरवाहियां सामने आई हैं. 

Jun 25, 2026 - 10:57
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Lucknow coaching center fire Case: लखनऊ हादसे में एलडीए की जांच में बड़ा खुलासा!
Lucknow coaching center fire Case
  • लखनऊ अग्निकांड के 18 अधिकारी-इंजीनियर गुनहगार!

Lucknow coaching center fire Case: लखनऊ अग्निकांड की जांच में 18 लोग दोषी पाए गए हैं, जिसमें LDA अधिकारी और इंजीनियर शामिल हैं. रिहायशी बिल्डिंग का व्यावसायिक उपयोग, फायर सेफ्टी की कमी और लापरवाही की बातें सामने आई हैं. UP की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में तीन मंजिला इमारत में सोमवार दोपहर आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई. यह इमारत एक 'डेथ ट्रैप' बन गई क्योंकि इसमें आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था. उस अकेले रास्ते में एयर-कंडीशनिंग पैनल, उलझे हुए तार और दूसरे उपकरण लगे हुए थे, जिससे आग फैलने पर अंदर फंसे लोगों के लिए बाहर निकलने के लिए बहुत कम जगह बची थी.

मामले में आए नए अपडेट के मुताबिक, अग्निकांड में LDA की जांच में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए हैं. LDA उपाध्यक्ष ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी है. दोषियों में पांच जोनल अधिकारी सहित कुल 18 इंजीनियर और संबंधित अधिकारी शामिल बताए गए हैं. इससे पहले LDA एक जूनियर इंजीनियर और एक असिस्टेंट इंजीनियर को निलंबित कर चुका है.

जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग का मैप आवासीय उपयोग के लिए अप्रूव कराया गया था. अप्रूव हुए मैप के उलट बिल्डिंग का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था. जांच में यह भी सामने आया है कि सा 2016 में अवैध निर्माण के खिलाफ जारी ध्वस्तीकरण आदेश बाद में निरस्त कर दिया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने ध्वस्तीकरण आदेश निरस्त किया था.

हादसे वाली इमारत में धुआं बाहर निकालने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी. आग लगने के बाद पूरी बिल्डिंग और कमरों में धुआं भर गया, जिससे ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने की वजह से हुई. एफआईआर के मुताबिक, बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे. आकस्मिक स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई वैकल्पिक या इमरजेंसी एग्जिट नहीं था.  बिल्डिंग में आने-जाने के लिए सिर्फ एक मेन एंट्रेंस और एग्जिट रास्ता था.  बिजली की वायरिंग और विद्युत उपकरण भी असुरक्षित तरीके से लगाए गए थे. बिल्डिंग के अंदर एसी के आउटर यूनिट और अन्य उपकरण सुरक्षा मानकों के विपरीत स्थापित थे.

अग्निशमन और NDRF टीम को रेस्क्यू के दौरान दीवार काटकर अंदर प्रवेश करना पड़ा. जांच में माना गया है कि बिल्डिंग संचालकों और जिम्मेदार लोगों को संभावित खतरे की जानकारी होने के बावजूद सुरक्षा उपाय नहीं किए गए. लखनऊ में हुए इस हादसे के बाद सवाल खड़े हुए हैं कि रिहायशी इलाके में कमर्शियल, बॉक्स जैसी इमारत कैसे चल रही थी. लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारी इस बात को लेकर जांच कर रहे हैं कि रिहायशी इलाके में रहने के मकसद से अप्रूव की गई इमारत का इस्तेमाल कमर्शियल गतिविधियों के लिए कैसे होने लगा.

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