स्पीकर से मुलाकात के बाद बोला उद्धव गुट, 'बागी सांसदों का कोई पत्र नहीं आया'

मुलाकात के बाद अरविंद सावंत ने दावा किया कि स्पीकर ने उन्हें बताया है कि अभी तक बागी गुट की तरफ से ऐसा कोई पत्र नहीं आया है. UBT नेताओं ने यह भी कहा कि संविधान, दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के हिसाब से किसी भी तरह की मान्यता या अलग बैठने की व्यवस्था नहीं दी जा सकती.

Jun 25, 2026 - 10:52
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स्पीकर से मुलाकात के बाद बोला उद्धव गुट, 'बागी सांसदों का कोई पत्र नहीं आया'
Photo:अरविंद सावंत (बाएं), उद्धव ठाकरे (बीच में) और अनिल देसाई (दाएं)

नई दिल्ली: शिवसेना यूबीटी के सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर बागी गुट से जुड़े किसी भी संभावित दावे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई. दोनों नेताओं ने स्पीकर से साफ तौर पर कहा कि बिना उनका पक्ष सुने कोई फैसला न लिया जाए. 

अरविंद सावंत ने बताया कि वो पिछले हफ्ते भी स्पीकर से मिले थे. तब भी उन्होंने यही आग्रह किया था कि अगर कोई व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से कहीं जाना चाहता है, तो फैसला लेते समय संविधान की भावना, कानूनी प्रावधानों का ध्यान रखा जाए. उन्होंने कहा कि इस बार भी स्पीकर से साफ पूछा गया कि क्या बागी गुट की ओर से कोई पत्र या दावा उनके पास पहुंचा है. सावंत के मुताबिक, स्पीकर ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई कागज उनके पास नहीं आया है.

UBT नेताओं का कहना है कि मौजूदा हालात में बागी गुट को किसी भी कीमत पर मान्यता नहीं मिल सकती. अरविंद सावंत ने साफ किया कि संविधान के नियमों में इसकी कोई जगह नहीं है. संसद में उनके अलग बैठने का इंतजाम भी नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा करना उन्हें अलग गुट के तौर पर स्वीकार करने जैसा होगा.

अनिल देसाई ने क्या कहा?: अनिल देसाई ने कहा कि स्पीकर ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि जो भी फैसला होगा, वह पूरी प्रक्रिया के तहत ही होगा. उन्होंने बताया कि स्पीकर ने कहा है कि अगर बागी गुट की ओर से कोई आवेदन आता है, तो पहले उसके दस्तावेजों की जांच की जाएगी. उसके बाद नियमों के मुताबिक निर्णय लिया जाएगा. देसाई ने यह भी कहा कि उन्होंने स्पीकर को दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए बताया कि सिर्फ संसदीय दल में संख्या बढ़ जाने भर से किसी दूसरे दल में जाने या विलय का रास्ता नहीं खुल जाता.

UBT नेताओं का कहना है कि संविधान की दसवीं अनुसूची साफ कहती है कि केवल संसदीय दल के दो-तिहाई सदस्य होने भर से कोई समूह अपने आप किसी दूसरी पार्टी में शामिल नहीं हो सकता. अनिल देसाई ने कहा कि विलय तभी माना जाएगा जब मूल राजनीतिक दल खुद किसी दूसरी पार्टी में विलय करे. ऐसे में सिर्फ सांसदों के आधार पर अलग गुट को मान्यता देने की मांग संवैधानिक रूप से टिकाऊ नहीं है. 

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