भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक रक्षा सौदा: जकार्ता खरीदेगा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें
भारत और इंडोनेशिया ने आधिकारिक तौर पर ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खरीद के लिए एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश बन गया है, जिससे दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में सामरिक संतुलन और भारत के रक्षा निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
नई दिल्ली/जकार्ता: भारत ने रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक और बड़ी ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। भारत और इंडोनेशिया ने आधिकारिक तौर पर 'ब्रह्मोस' (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति के लिए एक बहु-मिलियन डॉलर के रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक सौदे के बाद इंडोनेशिया, फिलीपींस के बाद भारत निर्मित इस अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली को खरीदने वाला दूसरा आसियान (ASEAN) देश बन गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौदा न केवल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारत-प्रशांत (Indo-Pacific) और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
सौदे की मुख्य बातें और सामरिक महत्व-
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तटीय रक्षा को मिलेगी मजबूती: इंडोनेशिया इस मिसाइल प्रणाली का उपयोग मुख्य रूप से अपनी तटीय सुरक्षा (Coastal Defence) और नौसैनिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए करेगा। द्वीपसमूहों से घिरे इंडोनेशिया के लिए ब्रह्मोस मिसाइलें समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में गेम-चेंजर साबित होंगी।
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हथियारों के निर्यात में भारत की लंबी छलांग: भारत सरकार ने साल 2024-25 में ₹21,000 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात दर्ज किया था। इंडोनेशिया के साथ हुआ यह नया ब्रह्मोस सौदा भारत के 'मेक इन इंडिया' और वैश्विक रक्षा निर्यातक बनने के लक्ष्य को और अधिक गति प्रदान करेगा।
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इंडो-पैसिफिक में नया समीकरण: चीन की बढ़ती समुद्री आक्रामकता के बीच, दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों द्वारा भारत से ब्रह्मोस जैसी मारक मिसाइलों की खरीद को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सौदा जकार्ता और नई दिल्ली के बीच गहरे होते रणनीतिक विश्वास को दर्शाता है।
दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल है ब्रह्मोस-
भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) तथा रूस के एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया (NPO Mashinostroyeniya) के संयुक्त उद्यम द्वारा विकसित 'ब्रह्मोस' को दुनिया की सबसे घातक और सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल माना जाता है।
मैक 2.8 (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना) की रफ्तार से चलने वाली यह मिसाइल रडार की नजर से बचकर दुश्मन के ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने में सक्षम है। इसे जहाज, पनडुब्बी, विमान और जमीन से भी दागा जा सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि इंडोनेशिया के साथ इस सफल समझौते के बाद वियतनाम, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे कई अन्य मित्र देश भी भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद के लिए बातचीत को जल्द ही अंतिम रूप दे सकते हैं।
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