Zojila Tunnel में भारत ने रचा इतिहास, अब लद्दाख-श्रीनगर के बीच सीधी कनेक्टिविटी

कश्मीर से लद्दाख जाने में 15 मिनट लगेंगे:अभी डेढ़ घंटे लगते हैं; Zojila Tunnel के दोनों छोर जुड़े, यह दुनिया की सबसे लंबी सिंगल ट्यूब टनल

Jun 10, 2026 - 12:21
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Zojila Tunnel में भारत ने रचा इतिहास, अब लद्दाख-श्रीनगर के बीच सीधी कनेक्टिविटी
Zojila Tunnel
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लद्दाख: Jammu-Kashmir और लद्दाख के बीच बन रही जोजिला टनल की खुदाई मंगलवार को पूरी हो गई। टनल के बीच बचा 2.5 मीटर का हिस्सा ब्लास्ट कर हटाया गया, जिससे सुरंग के दोनों छोर आपस में मिल गए। करीब 13.15 किलोमीटर लंबी यह दुनिया की सबसे लंबी दो-तरफा सड़क टनल होगी, जिसमें एक ही सुरंग के अंदर दोनों दिशाओं में वाहन चल सकेंगे। इसके शुरू होने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर आवाजाही संभव हो जाएगी, अभी सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण रास्ता अक्सर बंद हो जाता है।

यह टनल गांदरबल के बालटाल को लद्दाख के द्रास जिले के मिनीमार्ग से जोड़ेगी। इसके साथ लगभग 18 किलोमीटर लंबी एप्रोच रोड भी बनाई जा रही है। प्रोजेक्ट को फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

अभी जोजिला दर्रे का यह सफर तय करने में 1 से 1.5 घंटे लगते हैं, लेकिन टनल बनने के बाद यह दूरी सिर्फ 15 मिनट में तय की जा सकेगी।

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह अत्याधुनिक तकनीक से बनाई जा रही आधुनिक टनल है, जिसमें सुरक्षा और यातायात की सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

टनल बना रही कंपनी MEIL ने अपने X अकाउंट पर टनल की तस्वीरें शेयर की हैं…

टनल शुरू होने में 2 साल लगेंगे, 5 सवाल-जवाब में जानिए सबकुछ-

1. सवाल: टनल कब तक शुरू हो जाएगी?

जवाब: टनल में वेंटिलेशन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम और सड़क निर्माण का काम बाकी है। आम लोगों के लिए पूरी तरह खुलने में अभी करीब दो साल लगेंगे। परियोजना की निर्धारित समयसीमा 28 फरवरी 2028 है।

2. सवाल: टनल बनने से कितना समय बचेगा?

जवाब: अभी श्रीनगर से लेह जाने में 3 घंटे लगते हैं। सुरंग से 15 मिनट लगेंगे।

3. सवाल: टनल कितने सालों तक मजबूत बनी रहेगी?

जवाब: पहाड़ के अंदर चट्टानों की बनावट और मजबूती लगातार बदल रही थी, इसलिए यहां TBM की बजाय NATM (न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड) अपनाई गई। इसमें चट्टान की स्थिति के अनुसार तुरंत सपोर्ट डिजाइन बदला जा सकता है। इसी से टनल को 100 साल तक सुरक्षित रहने के हिसाब से डिजाइन किया।

4. सवाल: सुरक्षा के क्या इंतजाम किए?

जवाब: हवा के निकास को 484, 300 मी. और 213 मीटर गहरे तीन वर्टिकल शाफ्ट बनाए गए हैं। दोनों लेन के बीच डिवाइडर हैं। ऊंचाई 5.5 मी. रखी है, जिससे सेना के भारी टैंक भी आसानी से गुजर सकेंगे।

5. सवाल: सेना के लिए इतनी महत्वपूर्ण टनल की निगरानी कैसे होगी?

जवाब: यह एक स्मार्ट टनल होगी, जिसे SCADA सिस्टम से नियंत्रित किया जाएगा। आग या अन्य आपात स्थिति में सेंसर खुद अलर्ट देंगे और स्प्रिंकलर व पंप सक्रिय हो जाएंगे। दोनों सिरों पर 24 घंटे कंट्रोल रूम से निगरानी होगी।

अधिकारियों के अनुसार, टनल का लगभग 80% काम हो गया: करीब 11,578 फीट की ऊंचाई पर बन रही इस टनल की लागत लगभग ₹6,500 करोड़ है। अधिकारियों के अनुसार, टनल का लगभग 80% काम हो गया है। यह टनल 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची है। यह 31 किलोमीटर लंबी परियोजना का मुख्य हिस्सा है, जिसमें सोनमर्ग से मिनीमार्ग तक एप्रोच रोड और पुल भी शामिल हैं। इस परियोजना का निर्माण मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) कर रही है।

-30 डिग्री सेल्सियस की कड़ाके की ठंड में किया गया काम: टनल का काम कर रही मेघा इंजीनियरिंग के इंजीनियरों ने बताया, हर साल करीब 100 दिन -20 से -30 डिग्री की जमा देने वाली ठंड में काम करना पड़ा। पिछले 5 साल में 5 बड़े हिमस्खलन भी आए। इसके बावजूद टनल का काम नहीं रुका। सबसे खास बात यह रही कि पूरे प्रोजेक्ट के दौरान 1 करोड़ घंटे काम हुआ और किसी भी मजदूर की जान नहीं गई।

तय समय से छह महीने पहले पूरा हो गया टनल काम: MEIL ने नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NHIDCL) से यह प्रोजेक्ट हासिल किया और अक्टूबर 2020 में टनल का काम शुरू किया। NHIDCLके अधिकारियों ने बताया कि यह काम तय समय से छह महीने पहले ही पूरा हो गया है।

कंपनी ने एक बयान में कहा, वह एडवांस्ड 'न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड' (NATM) का इस्तेमाल करके सुरंग बना रही है, जिसे पहाड़ी इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत की सबसे अहम इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक माना जाता है।

पिछले पांच सालों में, इस साइट पर बर्फ खिसकने (एवलांच) की पांच घटनाएं हुई हैं। इनमें जनवरी 2023 की एक गंभीर घटना भी शामिल है, जब भारतीय सेना ने इलाके में फंसे 172 मजदूरों को बचाया था।

गडकरी ने कहा- आज भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक सुनहरा दिन है। मुझे खुशी है कि 14 किलोमीटर लंबी, अत्याधुनिक और दुनिया की सबसे लंबी यह टनल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए लाइफलाइन बनेगी।

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