मॉनसून के नए फेज का संकेत, क्लाउड मैप में पूरा भारत दिख रहा सफेद
नई दिल्ली : भारत के मौसमी क्लाउड मैप पर इन दिनों पूरा देश सफेद चादर में लिपटा नजर आ रहा है. पहली नजर में ऐसा लगता है मानो पूरे भारत पर बादलों का कब्जा हो गया हो. दरअसल, ISRO के INSAT-3DR और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की सैटेलाइट तस्वीरों में सफेद या चमकीले हिस्से घने और ऊंचे बादलों को दर्शाते हैं. ये बादल सूर्य की किरणों को अधिक रोकते हैं और इनके शीर्ष का तापमान काफी कम होता है, जो नमी से भरपूर और ऊंचाई वाले क्लाउड सिस्टम का संकेत है.
जून में मॉनसून की चाल सुस्त रही थी. कई राज्यों में पर्याप्त बादल नहीं बनने से बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ गया था. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी और कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने लगे थे. हालांकि, जुलाई के मध्य तक मौसम ने पूरी तरह करवट ले ली है.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मॉनसून ट्रफ अब सक्रिय हो गई है. साथ ही अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी का मजबूत प्रवाह देश के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच रहा है. यही वजह है कि सैटेलाइट क्लाउड मैप पर पूरे भारत में व्यापक सफेदी दिखाई दे रही है.
विशेषज्ञ इसे मॉनसून के नए सक्रिय चरण का संकेत मान रहे हैं. इस दौरान देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाओं की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. आने वाले दिनों में मॉनसून के और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है.
मॉनसून का नया दौर शुरू
IMD के मुताबिक अगले 4-5 दिनों तक उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत में मॉनसून सक्रिय रहेगा. 21 जुलाई को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और मेघालय में भारी से बहुत भारी, जबकि कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है.
उत्तर-पश्चिम भारत में जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 24 जुलाई तक, हिमाचल और उत्तराखंड में 26 जुलाई तक अच्छी बारिश जारी रहने की संभावना है. पूर्वी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में 23 जुलाई तक, जबकि पूर्वी राजस्थान में 23 से 26 जुलाई के बीच बारिश बढ़ेगी.
छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 26 जुलाई तक बारिश हो सकती है. बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश का अलर्ट है. वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय समेत उत्तर-पूर्व के राज्यों में लगातार बारिश जारी रहेगी.
कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और गुजरात में भी बारिश बढ़ने के आसार हैं. इस दौरान कई जगहों पर गरज-चमक, बिजली गिरने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं,दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहेंगी और केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में ही छिटपुट बारिश होगी.
क्या कहता है क्लाउड मैप का नया संकेत?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि क्लाउड मैप की यह सफेदी सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि मॉनसून सिस्टम की हेल्थ का इंडिकेटर है. जब क्लाउड कवर 60 प्रतिशत से ऊपर जाता है और डीप कन्वेक्टिव क्लाउड्स बढ़ते हैं, तो मॉनसून को मजबूत माना जाता है. यह 2026 के मॉनसून सीजन के लिए पॉजिटिव साइन है, हालांकि डिस्ट्रीब्यूशन अब भी बेतरतीब है.
यह नया फेज मॉनसून की पारंपरिक ताकत को दिखाता है. क्लाउड मैप की सफेदी डरावनी नहीं, बल्कि बारिश और राहत की खबर ले कर आई है. फिर भी बैलेंस जरूरी है- ज्यादा बारिश जहां फायदेमंद है, वहीं कुछ क्षेत्रों में अब भी बारिश की कमी बनी हुई है.
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