हर सामान ईएमआई पर लेने की होड़, सर्वे के आंकड़े बढ़ा रहे चिंता; क्या कर्ज के जाल में फंसता जा रहा है मिडिल क्लास!
नई दिल्ली : डेब्ट रेजोल्यूशन प्लेटफॉर्म Expert Panel के एक सर्वे में शामिल करीब 60 फीसदी कर्जदारों की मासिक ईएमआई उनकी पारिवारिक आय के बराबर या उससे ज्यादा हो चुकी है. ये हालात बताते हैं कि आय और कर्ज के बीच संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है. सर्वे में ये भी सामने आया है कि करीब 40 फीसदी लोग पुराने कर्ज की किस्त चुकाने के लिए New Loan लेने या Credit Card का सहारा लेने को मजबूर हैं. वित्तीय विशेषज्ञ इसे डेट ट्रैप यानी कर्ज के दुष्चक्र का संकेत मानते हैं.
मिडिल क्लास तेजी से कर्ज पर निर्भर होता जा रहा
घर खरीदने का सपना, बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल इमरजेंसी और रोजमर्रा के बढ़ते खर्च. इन सबके बीच देश का मिडिल क्लास तेजी से कर्ज पर निर्भर होता जा रहा है. आसान Loan, Credit Card और Digital Financing ने जरूरत के समय राहत तो दी है, लेकिन कई परिवारों के लिए ये कर्ज चिंता की वजह बनता जा रहा है. हाल ही में सामने आए एक survey ने संकेत दिए हैं कि बड़ी संख्या में कर्जदार बढ़ते ईएमआई बोझ और कर्ज के दुष्चक्र से जूझ रहे हैं.
किन वजहों से बढ़ रहा है कर्ज?: survey के आंकड़े बताते हैं कि लोग केवल Lifestyle खर्चों के लिए ही कर्ज नहीं ले रहे हैं. कई मामलों में आर्थिक मजबूरियां भी इसकी बड़ी वजह हैं. survey के मुताबिक, 26 फीसदी लोगों ने मेडिकल इमरजेंसी के चलते कर्ज लिया है. जबकि 22 फीसदी ने बच्चों की पढ़ाई या शादी के खर्च के लिए लोन लिया. वहीं, 18 फीसदी को नौकरी जाने या कारोबार में मंदी के कारण उधार लेना पड़ा और 15 फीसदी लोगों ने रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए कर्ज का सहारा लिया. ये आंकड़े दिखाते हैं कि बढ़ता कर्ज कंज्यूमर स्पेंडिंग के अलावा आर्थिक दबाव और अनिश्चितता का भी संकेत है.
कर्ज चुकाना क्यों हो रहा है मुश्किल?: सर्वे में शामिल लोगों ने कर्ज चुकाने में आने वाली परेशानियों की भी जानकारी दी. इसमें शामिल लोगों में से 33 फीसदी लोगों ने Job जाने या आय घटने को प्रमुख वजह बताया. वहीं 28 फीसदी ने कहा कि ईएमआई का बोझ आय के मुकाबले बहुत ज्यादा हो गया है. जबकि 19 फीसदी लोग एक से ज्यादा लोन होने के कारण दबाव में हैं और 12 फीसदी मामलों में मेडिकल या पारिवारिक इमरजेंसी वजह बनी. सबसे चिंताजनक बात है कि करीब 60 फीसदी कर्जदार केवल न्यूनतम भुगतान कर पा रहे हैं या फिर किस्ते चुकाने में चूक कर रहे हैं. वहीं लगभग 20 फीसदी लोगों को कानूनी नोटिस तक मिल चुके हैं.
बढ़ते कर्ज को लेकर क्यों है चिंता?: आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि हाल के वर्षों में घरेलू क्षेत्र की देनदारियां बढ़ी हैं, जबकि घरेलू बचत दर में भी गिरावट दर्ज की गई है. इसी वजह से अर्थशास्त्री और वित्तीय सलाहकार लगातार जिम्मेदार उधारी और वित्तीय अनुशासन की सलाह दे रहे हैं.
जानकारों का कहना है कि कर्ज लेना अपने आप में गलत नहीं है. घर, शिक्षा या कारोबार जैसे उद्देश्यों के लिए लिया गया कर्ज आर्थिक प्रगति का साधन बन सकता है. लेकिन जब ईएमआई का बोझ आय पर हावी होने लगे और पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लेना पड़े, तब यह स्थिति वित्तीय जोखिम का संकेत बन जाती है. यही वजह है कि वित्तीय सलाहकार कर्ज लेने से पहले आय, बचत और भविष्य की जरूरतों का सही आकलन करने की सलाह देते हैं. उनका मानना है कि राहत के लिए लिया गया कर्ज अगर क्षमता से ज्यादा हो जाए, तो भविष्य में बड़ी वित्तीय परेशानी की वजह बन सकता है.
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