Meerut Central Market Case: मेरठ में शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के लागों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं
- तीन महीने तक चला धरना रहा विफल, छोड़ना होगा सेटबैक.
मेरठ: शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के भविष्य पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई शुरू होते ही बाजार और धरना स्थल पर बेचैनी बढ़ गई थी। सेक्टर-2 में महिलाओं ने सुंदरकांड का पाठ किया। तीन महीने से आंदोलन कर रहे व्यापारी और परिवार फैसले का इंतजार किया लेकिन फैसला उनके हक में न आने के बाद उनके चेहरे उतर गए और महिलांओं की आंखों में आंसू आ गए। वहीं, व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात और कानूनी प्रयास समेत हर संभव कोशिश की, लेकिन राहत नहीं मिली। हमारे छोटे- छोटे घर आज टूटने की कगार पर आ गए हैं और हमारी सरकार के जनप्रतिनिधि कहीं गायब हो गए हैं।
44 भवनों को सील किया जा चुका
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर 2024 को स्कीम नंबर-7 के आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद आवास एवं विकास परिषद ने 8 अप्रैल 2026 को पूर्ण रूप से व्यावसायिक उपयोग में पाए गए 44 भवनों को सील कर दिया था। साथ ही 815 भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए गए थे।
तीन महीने के इस समय में व्यवारियों द्वारा लगातार प्रदर्शन करने के साथ- शहर बंद करने की घोषणा, नोटिस का विरोध जलप्रिनिधियों से मुलाकात, वकीलों से मुलाकात और तमाम काम किए गए लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ।
सेक्टर-2 में शुरू हुआ सुंदरकांड पाठ
सुनवाई शुरू होते ही सेक्टर-2 में स्थानीय लोगों ने सुंदरकांड का पाठ किया। मौके पर मौजूद महिलाओं ने कहा कि अब उनके घर, कारोबार और भविष्य का फैसला भगवान के हाथ में है। उन्होंने न्याय मिलने की प्रार्थना की। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी है। फैसले पर स्थानीय लोगों और प्रशासन की नजर बनी हुई है।
सुनवाई पूरी होने से पहले महिलाएं भावुक हो गईं
फैसला आने से पहले ही धरना स्थल का माहौल गमगीन हो गया। पिछले तीन महीने से लगातार धरने पर बैठीं महिलाएं भावुक हो गईं। सभी की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।
पहले समझिए सेंट्रल मार्किट का गणित
सेंट्रल मार्किट में कुल 860 संपत्तियां हैं, जिन्हें नियमों को ताक पर रखकर तैयार किया गया है। यह सभी या तो आवास रहे या फिर आवासीय जमीन। लेकिन जमीन के मालिक ने नियमों को नजर अंदाज कर यहां कॉमर्शियल निर्माण कर डाला।
इनके खिलाफ शिकायत हुई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और पहले चरण में 44 संपत्तियों को सील करा दिया। अब 816 संपत्तियां हैं, जिन पर एक्शन की तैयारी है।
सेक्टर 2 के व्यापारी अर्पित मोगा ने सुनवाई के बारे में जानकारी देते हुए गताया कि यह बात कोर्ट में हुई है कि चाहे भवन 25 मीटर का हो, 38 मीटर का, 44 मीटर का या उससे बड़ा, सभी मामलों में समान नियम लागू होंगे। जिन भवनों का पूरा हिस्सा व्यावसायिक उपयोग में पाया जाएगा, उन पर पूरी तरह ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जिन भवनों में आंशिक रूप से अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग है, उनका मौके पर निरीक्षण कर यह तय किया जाएगा कि किस हिस्से पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रभावित लोगों का आरोप है कि EWS, LIG और MIG श्रेणी के मकानों को भी किसी प्रकार की राहत नहीं दी गई है। उनका कहना है कि मकान छोटा हो या बड़ा, सेटबैक की समस्या हो या अन्य तकनीकी मुद्दे, किसी भी आधार पर राहत देने की बात नहीं कही गई।
स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि यदि किसी भवन में बिना अनुमति के अतिरिक्त मंजिलें (G+1, G+2 या G+3) बनाई गई हैं, तो उन पर भी कार्रवाई होगी। लोगों का कहना है कि समय के साथ परिवार बढ़ने के कारण कई लोगों ने अपनी आवश्यकता के अनुसार मकानों का विस्तार किया था, लेकिन अब कार्रवाई की स्थिति में उनके सामने रहने का संकट खड़ा हो सकता है।
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