मुझे कम उम्र में ही काफ़ी कुछ झेलना पड़ा: मयंक यादव
- मयंक ने कहा, "श्रेयस की कप्तानी में खेलते हुए मैं पूरी तरह सहज महसूस कर रहा था"
Sports News Update: मयंक यादव जब 2024 में भारत के लिए डेब्यू करने उतरे थे, तब वह महज़ 22 साल के थे और अपनी रफ़्तार के लिए जाने जाते थे। लेकिन उसके बाद लगातार चोटों ने उन्हें मैदान से दूर कर दिया। उनका कहना है कि इतनी कम उम्र में उन्हें "बहुत कुछ झेलना पड़ा"। हालांकि, भारत के लिए खेलने का उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। उसी दृढ़ संकल्प का नतीजा था कि उन्होंने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ पहले T20I में वापसी करते हुए प्लेयर ऑफ़ द मैच का पुरस्कार जीता।
हरारे में चार ओवर में 18 रन देकर दो विकेट लेने के बाद मयंक ने कहा, "यह दौर बहुत मुश्किल था। ख़ासकर दो साल का अंतराल मेरे लिए बड़ी चुनौती था क्योंकि उम्र भी मेरे पक्ष में नहीं थी। मैं तब सिर्फ़ 22-23 साल का था। मुझे लगा कि इतनी कम उम्र में ही मुझे इतना कुछ झेलना पड़ रहा है। लेकिन देश के लिए खेलने की प्रेरणा हमेशा बनी रही। इसलिए मैं वापसी करना चाहता था और पहले की तरह प्रदर्शन करना चाहता था।"
तीन मैचों की सीरीज़ के पहले मुकाबले में भारत युवा तेज़ गेंदबाज़ों के साथ उतरा था। प्रिंस यादव ने हाल ही में इंग्लैंड और आयरलैंड के दौरे पर डेब्यू किया था और यह उनका चौथा T20I था। अशोक शर्मा ने इसी मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। खु़द मयंक भी भारत के लिए सिर्फ़ तीसरा मैच खेल रहे थे। 71 T20I खेल चुके शिवम दुबे टीम के सबसे अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ थे।
इसके बावजूद भारत ने पावरप्ले में सिर्फ़ 26 रन दिए और तीन विकेट झटके। पहली पारी में कुल सात विकेट गिरे, जिसमें से पांच तेज़ गेंदबाज़ों ने हासिल किए। मयंक और प्रिंस ने दो-दो विकेट लिए, जबकि दुबे को एक सफलता मिली। अशोक शर्मा विकेट नहीं ले सके, लेकिन अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में उन्होंने प्रभावित किया।
अन्य युवा तेज़ गेंदबाज़ों के साथ बातचीत को लेकर मयंक ने कहा, "हम रफ़्तार को लेकर ज़्यादा बात नहीं करते, लेकिन हमारे बीच अच्छा तालमेल है। आज मैंने पहला ओवर फेंका था, इसलिए मैंने प्रिंस और अशोक को बताया कि पिच से कैसी मदद मिल रही है और किस तरह की गेंदबाज़ी ज़्यादा असरदार हो सकती है। पहले छह ओवर के बाद हम बहुत अच्छी स्थिति में थे। इसलिए हमारी बातचीत इस बात पर थी कि हम उन्हें और कितना दबाव में रख सकते हैं और क्या-क्या विकल्प अपनाए जा सकते हैं।"
ज़िम्बाब्वे को 125 रन पर रोकने के बाद भारत ने सात विकेट से आसान जीत दर्ज की। यह इसी साल T20 विश्व कप जीतने के बाद भारत की पहली जीत थी और श्रेयस अय्यर की भारत के T20I कप्तान के रूप में पहली जीत भी। इससे पहले उनकी कप्तानी में टीम सात मैचों तक जीत दर्ज नहीं कर सकी थी। मयंक ने कहा कि अय्यर की कप्तानी में उन्होंने खु़द को "आत्मविश्वास से भरा" और "पूरी तरह सहज" महसूस किया।
मयंक ने कहा, "मैच से पहले मेरी उनसे ज़्यादा बात नहीं हुई थी। लेकिन मैच के दौरान उन्होंने गेंदबाज़ों पर पूरा भरोसा दिखाया। मुझे अच्छा लगा कि उन्होंने मेरी योजना के मुताबिक गेंदबाज़ी करने का समर्थन किया।
"जब उन्होंने मुझे कुछ सलाह दी, तो उसे लागू करने में मुझे पूरा आत्मविश्वास महसूस हुआ और उस समय वह सही विकल्प भी लगा। उनकी कप्तानी में खेलते हुए मैं काफ़ी सहज महसूस कर रहा था। पहली बार मैं उनकी कप्तानी में खेल रहा था। इससे पहले मैंने उन्हें सिर्फ़ टीवी पर या दूसरी टीमों की कप्तानी करते हुए देखा था। उनके नेतृत्व में खेलना मुझे बहुत अच्छा लगा।"
भारत की जीत की राह वैभव सूर्यवंशी ने आसान बना दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने सिर्फ़ 18 गेंदों में अपना पहला T20I अर्धशतक पूरा किया और भारत ने पावरप्ले में ही 66 रन बना लिए।
मयंक ने IPL 2026 में वैभव की तूफ़ानी बल्लेबाज़ी का सामना किया था, जब युवा बल्लेबाज़ ने 38 गेंदों पर 93 रन बनाकर राजस्थान रॉयल्स को 221 रन का लक्ष्य हासिल करा दिया था। मयंक ने कहा कि इस बार उन्हें राहत थी कि वैभव उनकी अपनी टीम में थे।
मयंक ने कहा, "उसकी बल्लेबाज़ी अविश्वसनीय है। जब मैंने उसे गेंदबाज़ी की, तब उसने ऐसे शॉट खेले जिनकी इतनी कम अनुभव वाले युवा खिलाड़ी से उम्मीद नहीं की जा सकती। उसे बल्लेबाज़ी करते देखना हमेशा आनंद देता है।
"इस उम्र में उसके पास जो प्रतिभा है, वह शानदार है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि 15 साल का कोई लड़का आएगा और इस तरह सभी गेंदबाज़ों की धुनाई करेगा। इस बार उसे अपनी टीम में पाकर बहुत अच्छा लगा। IPL में जब हम राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ खेले थे, तब उसने हमारी गेंदबाज़ी की जमकर पिटाई की थी।"
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