महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला; हाइवे किनारे बने अवैध ढाबों और होटलों पर 60 दिनों में चलेगा बुलडोजर, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों (Highways) के किनारे बने अनधिकृत होटलों, ढाबों और खान-पान की दुकानों को हटाने के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शहरी स्थानीय निकायों और जिलाधिकारियों को अवैध ढाबों पर कार्रवाई करने और नए निर्माण पर तुरंत रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य सड़क हादसों को रोकना और यातायात को सुगम बनाना है।
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्यभर के हाईवे और मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और कड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य के नगर निकायों (Urban Local Bodies) और जिलाधिकारियों (District Magistrates) को आदेश जारी किया गया है कि वे राजमार्गों के राइट ऑफ वे (Right of Way) और प्रतिबंधित क्षेत्रों में बने सभी अनधिकृत होटलों, ढाबों और खाने-पीने की दुकानों को 60 दिनों के भीतर ध्वस्त (Demolish) करें।
यह कार्रवाई सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं पर नियंत्रण को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा अप्रैल 2026 में दिए गए ऐतिहासिक आदेश के अनुपालन में की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कड़ा कदम
हाइवे पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक गाड़ियों के मुड़ने, अवैध पार्किंग और सड़कों के किनारे बने अवैध ढाबों के कारण होने वाले गंभीर हादसों पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए थे:
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60 दिन की डेडलाइन: जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को आगामी दो महीनों (60 दिन) के भीतर सभी अवैध संरचनाओं को हटाने की समयसीमा दी गई है।
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नए निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध: राजमार्गों के किनारे निर्माण रहित क्षेत्र (No-Construction Zones) में किसी भी नई व्यावसायिक गतिविधि, बोर्ड या शेड बनाने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
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सड़क रख-रखाव और सुरक्षा: सड़कों के दोनों ओर से अतिक्रमण हटने से न केवल गाड़ियां सुचारू रूप से चल सकेंगी, बल्कि आपातकालीन वाहनों और हाईवे मेंटेनेंस में भी आसानी होगी।
जन-प्रतिक्रिया: समर्थन और चिंताएं
सरकार के इस कड़े रुख के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं:
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यात्रियों का पक्ष: अधिकांश वाहन चालकों और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका मानना है कि हाइवे पर अनाधिकृत पार्किंग और ढाबों के कारण होने वाले जानलेवा हादसों में भारी कमी आएगी।
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छोटे व्यापारियों की चिंता: दूसरी ओर, लंबे समय से हाइवे पर छोटे ढाबे या टपरी चलाकर आजीविका कमाने वाले विक्रेताओं में अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और चिंता का माहौल है। वहीं कुछ नियमित यात्रियों ने लोकप्रिय और पुराने 'पसंदीदा हॉल्ट्स' के बंद होने पर अफसोस भी जताया है।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा और नागरिकों की जान-माल की रक्षा सर्वोपरि है और तय समयसीमा के भीतर इस अभियान को हर हाल में पूरा किया जाएगा।
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