'वंदे मातरम' को मिला राष्ट्रगान जैसा दर्जा, सरकारी कार्यक्रमों में सभी 6 छंद अनिवार्य, शशि थरूर ने खड़े किए सवाल
राष्ट्रपति ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026' The Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के बराबर वैधानिक दर्जा दिया गया है और सरकारी आयोजनों में इसके सभी 6 छंद गाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस फैसले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने व्यावहारिक चुनौतियां उठाते हुए कहा कि इससे कार्यक्रमों में खड़े रहने की अवधि 12 मिनट तक बढ़ सकती है।
नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026' (Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Act, 2026) को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इस संशोधन के जरिए वंदे मातरम को कानूनी तौर पर राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान दर्जा और सुरक्षा दी गई है।
कानून में क्या हुआ बदलाव?
संसद द्वारा पारित
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समान कानूनी सुरक्षा: 1971 के मूल अधिनियम की धारा 3 में संशोधन कर वंदे मातरम के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या व्यवधान डालने पर राष्ट्रगान के समान ही कानूनी सजा का प्रावधान किया गया है।
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समयावधि: राष्ट्रगान 'जन गण मन' के गायन में जहाँ 52 सेकंड का समय लगता है, वहीं वंदे मातरम के पूरे संस्करण के गायन में लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है।
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संविधान सभा का संदर्भ: इस फैसले का आधार 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का वह ऐतिहासिक वक्तव्य है, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के लिए वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने की बात कही थी।
शशि थरूर ने व्यावहारिक चुनौतियों पर उठाए सवाल
संशोधन कानून पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद
"राष्ट्रगान 'जन गण मन' के लिए 52 सेकंड का समय पर्याप्त होता है। राष्ट्रगीत के पूरे 6 छंदों में 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगता है। तमिलनाडु जैसे राज्यों में राज्य गीत (Tamil State Song) भी बजता है। ऐसे में कार्यक्रमों की शुरुआत और अंत मिलाकर दर्शकों को 12 मिनट तक खड़े रहना होगा। क्या कानून बनाकर सम्मान और धैर्य थोपा जा सकता है?" — शशि थरूर, सांसद
इसके अलावा केरल प्रशासन से जुड़े कुछ अधिकारियों ने भी सवाल उठाया है कि देशभक्ति को अनिवार्य नियम बनाने से सम्मान के बजाय थकान की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
परंपरा बनाम अनिवार्यता पर छिड़ी बहस
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समर्थकों का पक्ष: समर्थकों का तर्क है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित 'वंदे मातरम' भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे बड़ा मंत्र रहा है। इसे राष्ट्रगान के बराबर सम्मान देना स्वतंत्रता सेनानियों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
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आलोचकों का पक्ष: विपक्ष और आलोचकों का कहना है कि देशभक्ति और सम्मान स्वतः आना चाहिए, न कि जबरन नियम बनाकर थोपा जाना चाहिए।
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