India-Japan Action Plan: भारत और जापान के बीच बड़ा समझौता; अगले दशक में 5 लाख लोगों के आदान-प्रदान का लक्ष्य, राज्यसभा में सरकार का बयान
भारत और जापान के बीच कुशल पेशेवरों, छात्रों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक एक्शन प्लान तैयार किया गया है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी कि टोक्यो में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए 'जॉइंट विजन फॉर द नेक्स्ट डिकेड' (Joint Vision for the Next Decade) के तहत अगले दशक में 5,00,000 (5 लाख) लोगों के आदान-प्रदान का लक्ष्य रखा गया है।
नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़े कदम का खुलासा किया है। सरकार ने संसद के उच्च सदन राज्यसभा (Rajya Sabha) में सूचित किया कि भारत और जापान ने अगले एक दशक के भीतर 5,00,000 (5 लाख) लोगों के आदान-प्रदान (Personnel Exchange) का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
विदेश राज्य मंत्री ने एक लिखित उत्तर में बताया कि यह एक्शन प्लान दोनों देशों द्वारा टोक्यो में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन में अपनाए गए 'जॉइंट विजन फॉर द नेक्स्ट डिकेड' (Joint Vision for the Next Decade) का एक प्रमुख हिस्सा है।
किन क्षेत्रों में होगा 5 लाख लोगों का आदान-प्रदान? (Key Focus Areas)
सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस एक्शन प्लान में केवल पर्यटन या सरकारी अधिकारी ही शामिल नहीं हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और युवाओं को अवसर दिए जाएंगे:
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कुशल पेशेवर और आईटी विशेषज्ञ (Skilled Professionals): भारतीय आईटी (IT), इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और रिसर्च सेक्टर के पेशेवरों को जापान में काम करने का अवसर मिलेगा।
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छात्र और शोधकर्ता (Students & Researchers): दोनों देशों के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच छात्रों और विद्वानों का आवागमन बढ़ाया जाएगा।
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तकनीकी प्रशिक्षक (TITP & SSW): 'स्पेसिफाइड स्किल्ड वर्कर' (SSW) और 'टेक्निकल इंटर्न ट्रेनिंग प्रोग्राम' (TITP) के तहत भारतीय युवाओं को जापान में उच्च-स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार मिलेगा।
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सांस्कृतिक व पर्यटन आदान-प्रदान: दोनों देशों के बीच पर्यटन (Tourism) और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए जन-दर-जन (People-to-People) संबंधों को प्रगाढ़ किया जाएगा।
'जॉइंट विजन फॉर द नेक्स्ट डिकेड' (Joint Vision)
टोक्यो में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी नेतृत्व ने अगले 10 वर्षों के लिए दोनों देशों के संबंधों का खाका तैयार किया था।
जापान में घटती कार्यबल (Shrinking Workforce) और भारत के पास उपलब्ध विशाल युवा एवं कुशल कार्यबल को देखते हुए यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए 'विन-विन' (Win-Win) स्थिति पैदा करेगा।
रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी होगी मजबूत
सरकार ने बताया कि 5 लाख लोगों की गतिशीलता (Mobility) का यह लक्ष्य न केवल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा, बल्कि इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा के साझा दृष्टिकोण को भी मजबूत करेगा।
दोनों देश इस योजना को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भाषा प्रशिक्षण केंद्रों को बढ़ावा देने पर भी काम कर रहे हैं।
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