Govinda Reveals Personal Phase: मां के निधन के बाद नर्मदा नदी में उतर गए थे गोविंदा; 'सुसाइड' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वालों को दिया करारा जवाब

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता गोविंदा ने हाल ही में दिए साक्षात्कार में अपनी मां निर्मला देवी के निधन के बाद के एक बेहद भावुक और कठिन दौर को याद किया है। गोविंदा ने खुलासा किया कि 1996 में मां को खोने के बाद वे गहरे शोक में डूब गए थे और नर्मदा नदी में पानी के अंदर तक चले गए थे, क्योंकि उन्हें लगा था कि वहां आगे जाकर वे अपनी मां से दोबारा मिल सकेंगे।

Aug 10, 2026 - 12:44
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Govinda Reveals Personal Phase: मां के निधन के बाद नर्मदा नदी में उतर गए थे गोविंदा; 'सुसाइड' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वालों को दिया करारा जवाब

मुंबई: 90 के दशक के सुपर-सफल अभिनेता गोविंदा (Govinda) अपनी मां निर्मला देवी (Nirmala Devi) के बेहद करीब थे। 15 जून 1996 को 69 वर्ष की आयु में जब उनकी मां का निधन हुआ, तो इस सदमे ने अभिनेता को मानसिक और भावनात्मक रूप से तोड़कर रख दिया था। हाल ही में एक विशेष साक्षात्कार में गोविंदा ने उस दौर का एक अत्यंत संवेदनशील और अनसुना प्रसंग साझा किया।

"लगा था सब खत्म हो गया": गोविंदा

अपनी मां के निधन के बाद के भावनात्मक दर्द को याद करते हुए गोविंदा ने कहा:

"मैं बहुत ज्यादा तकलीफ में था। मुझे उस समय लगा कि अब सब कुछ खत्म हो चुका है, बस यही अंत है।"

इसी असहनीय दुख के बीच गोविंदा नर्मदा नदी के तट पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मां के प्रति अगाध प्रेम के कारण उनके मन में यह बात बैठ गई थी कि नदी में आगे जाने पर वे अपनी मां से दोबारा मिल सकेंगे।

  • नर्मदा नदी की घटना: "मैं नर्मदा नदी पर था। मुझे लगा कि अगर मैं नदी में थोड़ा और आगे जाऊंगा, तो मेरी मुलाकात मेरी मां से दोबारा हो जाएगी। इसलिए मैं पानी में उतरता चला गया।"

क्या वह आत्महत्या की कोशिश थी?

साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह एक तरह से अपनी जान लेने (Suicide) की कोशिश थी, तो गोविंदा ने बेहद गंभीरता से कहा, "एक तरह से हां (Kind of)। मैं अपनी मां से बहुत ज्यादा जुड़ा हुआ था और उनसे बहुत प्यार करता था।"

हालांकि, दुनिया द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 'सुसाइड' शब्द पर बात करते हुए गोविंदा ने कहा:

"दुनिया इसे यही नाम देती है, लोग सुसाइड जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन हमारे लिए ऐसा कुछ नहीं है। जिंदगी कभी खत्म नहीं होती, यह बस नए रूप और नए चेहरे ले लेती है।"

कैसे बदली सोच और कौन बना सहारा?

गोविंदा ने बताया कि जब वे नदी में थे, तब राम कुंडल नाम के एक साधु/पुजारी ने उन्हें देखा और आवाज देकर बाहर बुलाया। उस घटना ने उन्हें यह अहसास कराया कि वे गलत कदम उठा रहे हैं और उन्हें अपने बच्चों और परिवार के लिए जीना है।

गोविंदा को उस स्थिति से उबरने में करीब 15 दिनों का समय लगा। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद फिल्मों, अभिनय और स्टारडम को लेकर उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया और उन्होंने अपनी मां के सपनों को पूरा करने में ही जीवन की असली सार्थकता पाई।

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