मेरठ में अवैध 'पुलिस चौकी' का भंडाफोड़; फर्जी सीओ, एसएचओ और दरोगा बनकर ऐसे करते थे ब्लैकमेलिंग, दो गिरफ्तार
यूपी के मेरठ जिले में कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। टीपीनगर थाना क्षेत्र के मोहकमपुर में राहुल और आकाश ने अवैध रूप से पूरी 'पुलिस चौकी' ही स्थापित कर दी थी। इंस्टाग्राम पर दोस्ती कर लोगों को जाल में फंसाने वाले ये आरोपी फर्जी एसएचओ (SHO) और दरोगा बनकर लोगों पर रौब गालिब करते थे और अवैध वसूली करते थे। पुलिस ने इस फर्जी चौकी का भंडाफोड़ कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मेरठ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से कानून-व्यवस्था और पुलिस महकमे को हैरान कर देने वाला एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिले में फर्जी टेलीफोन एक्सचेंज के खुलासे के बाद अब ब्रह्मपुरी थाना पुलिस ने टीपीनगर थाना क्षेत्र के मोहकमपुर में एक कार्यालय की आड़ में अवैध रूप से संचालित की जा रही 'पुलिस चौकी' का पर्दाफाश किया है।
टीपीनगर थाना क्षेत्र के मोहकमपुर इलाके में अवैध रूप से चलाई जा रही इस फर्जी पुलिस चौकी से आरोपी 'फर्जी एसएचओ' और 'फर्जी दरोगा' बनकर आम लोगों पर रौब गालिब करते थे और ब्लैकमेल कर मोटी रकम ऐंठते थे। इतना ही नहीं उस कार्यालय को पुलिस चौकी साबित करने के लिए वहां वॉकी टॉकी, नेम प्लेट और वर्दी भी रखी जाती थी।
इंस्टाग्राम पर दोस्ती और हनीट्रैप का शातिर खेल
पुलिस के मुताबिक, राहुल और आकाश की फितरत में लोगों को धोखे से फंसाना शामिल था। वे बेहद योजनाबद्ध तरीके से शिकार तलाशते थे:
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इंस्टाग्राम पर फर्जी प्रोफाइल: आरोपी इंस्टाग्राम पर फर्जी नाम और आकर्षक प्रोफाइल बनाकर एक्टिव रहते थे। उनके निशाने पर मुख्य रूप से लड़के-लड़कियों की जोड़ियां, युवा और शौकीन किस्म के लोग होते थे।
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दोस्ती और मिलने का न्योता: सोशल मीडिया पर मीठी-मीठी बातें करके और दोस्ती का नाटक करके वे पीड़ितों को अपने जाल में फंसाते थे और मिलने के लिए मोहकमपुर इलाके के आसपास बुलाते थे।
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अवैध चौकी में एंट्री और खौफ: जैसे ही पीड़ित बताए गए स्थान पर पहुंचते थे, गिरोह के सदस्य उन्हें किसी न किसी बहाने या जबरन उठाकर मोहकमपुर स्थित अपनी इस 'अवैध पुलिस चौकी' में ले आते थे।
फर्जी सीओ, एसएचओ और दरोगा बनकर धौंस
अवैध चौकी के अंदर पहुंचते ही राहुल और आकाश पुलिस की खाकी वर्दी पहनकर बैठ जाते थे।
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एक आरोपी खुद को क्षेत्राधिकारी (CO) या थाना प्रभारी (SHO) बताता था, तो दूसरा दरोगा (Inspector) बनकर पीड़ितों पर चिल्लाता और रौब झाड़ता था।
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वे पीड़ितों पर अश्लीलता फैलाने, अवैध गतिविधियों में शामिल होने या संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की धमकी देते थे।
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लोक-लाज और जेल जाने के डर से घबराकर पीड़ित उनके सामने गिड़गिड़ाने लगते थे, जिसके बाद मामले को 'रफा-दफा' करने के नाम पर आरोपी लाखों रुपये की रंगदारी (Extortion) ऐंठ लेते थे।
ब्रह्मपुरी पुलिस की छापेमारी में भंडाफोड़
इस पूरे खेल का भंडाफोड़ तब हुआ जब एक पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर पूरे मामले की गुप्त सूचना ब्रह्मपुरी थाना पुलिस को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने सर्विलांस और मुखबिर की मदद से मोहकमपुर स्थित इस संदिग्ध ठिकाने की घेराबंदी की और अचानक छापेमारी कर दी।
छापेमारी के दौरान मौके पर राहुल और आकाश खाकी वर्दी में मौजूद थे और एक व्यक्ति को धमका रहे थे। असली पुलिस को सामने देखकर फर्जी अधिकारियों के होश उड़ गए।
मौके से मिलीं ये चीजें
पुलिस ने अवैध चौकी से फर्जीवाड़े में इस्तेमाल होने वाली निम्नलिखित सामग्रियां जब्त की हैं:
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पुलिस अधिकारी की वर्दी, स्टार और नेम प्लेट।
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वायरलेस/वॉकी-टॉकी सेट (नकली)।
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पुलिस के जाली पहचान पत्र (Fake ID Cards) और फर्जी मुहरें।
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रंगदारी में वसूले गए नकद रुपये और कई मोबाइल फोन।
पुलिस प्रशासन का बयान और आगे की कार्रवाई
ब्रह्मपुरी पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों राहुल और आकाश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि इस फर्जी चौकी के जरिए अब तक कितने लोगों से रंगदारी वसूली गई है और क्या इसमें स्थानीय स्तर पर किसी अन्य व्यक्ति की सांठगांठ थी।
शहर में इस तरह सरेआम अवैध चौकी चलाए जाने की खबर के बाद से व्यापारिक और राजनीतिक गलियारों में पुलिस की सर्विलांस व्यवस्था पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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