उत्तराखंड की बबीता को धरती निगल गई या आसमान! करीब बीस दिनों से लापता: पुलिस, वन विभाग-NDRF, SDRF और चौपर ने की तलाश, कामयाबी नहीं
उत्तराखंड: रामनगर निवासी 24, वर्षीय युवती बबीता पांडेय को धरती निगल गई या आसमान अभी तक पता नहीं चला है। बबीता पांडेय ने अपनी मां को 28,मई को दो सहेलियों के साथ ट्रैकिंग पर जाने की बात कहकर घर से निकली थी। हालांकि, वह अपनी सहेलियों के साथ नहीं उधम सिंहनगर निवासी और यूपी के शाहजहांपुर निवासी दोस्तों के साथ 28, मई को गई थी। बताया जाता है कि बबीता की दोस्ती दोनों से आनलाइन हुई थी। रात में वह अपने दोस्तों के साथ टेंट में ही रुक गई थी। रात में दोस्तों ने शराब पी और वह इससे नाराज हो गई।
यह भी हो सकता है कि उसकी दोस्तों से कहासुनी भी हुई हो। उसी रात वह टेंट से निकल कर एक पेड़ के नीचे बैठकर मोबाइल पर गाना सुनने लगी। इस पर पास में एक अन्य टेंट में बच्चों के साथ रुके शिक्षक ने उसे तेज आवाज में गाना बजाने पर मना किया।इस बीच उसके दोनों दोस्त सो गए। सुबह होने पर दोस्तों की नींद खुली तो देखा कि बबीता नहीं है। सुबह से शाम तक हर संभव स्थान पर दोस्तों ने उसकी तलाश की पर पता नहीं चला। फिर जिस स्थान पर उसके दोस्त जहां टिके थे वहां से चार किलोमीटर दूर थक हारकर दोस्तों ने पुलिस स्टेशन पर पुलिस को और परिवार के सदस्यों को 29,मई को सूचना दी।
मां को जब यह पता चला कि वह सहेलियों के साथ नहीं दोस्तों के साथ गई है तो काफी सदमा लगा। करीब बीस दिनों से पुलिस,वन विभाग एनडीआरएफ,, एसडीआरएफ और चौपर से उसकी तलाश की जा रही है पर किसी को कामयाबी नहीं मिल रही है।
पुलिस ने बबीता के दोस्तों से कई राउंड पूछताछ की पर कोई सुराग नहीं लगा। बबीता की जंगल से लेकर झीलों तक चौबीस घंटे तलाश जारी है। पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों को भी यह नहीं सूझ रहा है कि बबीता प्रकरण की थ्योरी क्या है।उसका मोबाइल भी बंद है। एक गलत जानकारी ने बबीता पांडेय के परिवार के सदस्यों की दिन और रात की नींद छीन ली है।
ईश्वर से दुआ है कि बबीता सकुशल मिल जाए जिससे परिवार के सदस्यों को जीने का सहारा मिल जाए। ऐसे में युवतियों को सतर्कता के तौर पर घर पर सही जानकारी साझा करने की जरूरत है।
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