टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एजीएम से पहले दिया इस्तीफा, पुनर्नियुक्ति के लिए नहीं करेंगे आवेदन

Aug 12, 2026 - 12:11
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टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एजीएम से पहले दिया इस्तीफा, पुनर्नियुक्ति के लिए नहीं करेंगे आवेदन
N. Chandrasekaran

नई दिल्ली। टाटा समूह में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत हो गई है। एनडीटीवी प्रॉफिट के सूत्रों के हवाले से आई एक रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि वह अपने मौजूदा कार्यकाल के अंत तक, यानी फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे, लेकिन पुनर्नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं करेंगे।  

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पिछले कई महीनों से उनके कार्यकाल के विस्तार को लेकर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों की खबरें सामने आ रही थीं।

टाटा संस देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक है और टीसीएस, टाटा मोटर्स, एयर इंडिया समेत 30 से अधिक प्रमुख कंपनियों को नियंत्रित करता है। वहीं, टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसके चलते समूह के रणनीतिक फैसलों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

अपने बयान में एन. चंद्रशेखरन ने कहा, "मैंने टाटा ग्रुप में अपने प्रोफेशनल जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं। मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने के बेहद संतोषजनक अवसर के लिए आभारी हूं। पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत सम्मान और बड़ी ज़िम्मेदारी की बात रही है।"

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और उनके बीच मतभेद उभरकर सामने आए थे। बताया जा रहा है कि समूह के भविष्य के गवर्नेंस ढांचे, टाटा संस की संभावित लिस्टिंग और बोर्ड में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के विचार अलग-अलग थे। इसी कारण कार्यकाल विस्तार पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

गौरतलब है कि एन. चंद्रशेखरन ने वर्ष 1987 में टाटा समूह के साथ अपना करियर शुरू किया था। वर्ष 2009 में वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बने और उनके नेतृत्व में कंपनी ने वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय विस्तार किया। इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान टाटा समूह ने कई बड़े कारोबारी और परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना किया है। एयर इंडिया से जुड़े नियामकीय मुद्दे, टीसीएस पर मूल्य निर्धारण का दबाव और जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले जैसी घटनाएं समूह के लिए चुनौती बनी रहीं। इसके बावजूद समूह ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और विस्तार की रणनीति को आगे बढ़ाया।

टाटा समूह के इतिहास में टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद पहली बार सामने नहीं आए हैं। इससे पहले वर्ष 2016 में तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री को पद से हटाने को लेकर भी दोनों संस्थाओं के संबंध चर्चा में रहे थे। अब चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद समूह की अगली नेतृत्व व्यवस्था पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

इनपुट :आईएएनएस

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