'कर्मा' के आइकॉनिक गाने पर सुभाष घई को गर्व; बोले— "आज भी हर नेशनल इवेंट में गूंजती है यह धुन"

मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई अपनी 1986 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कर्मा' के सदाबहार देशभक्ति गीत 'दिल दिया है जान भी देंगे, ए वतन तेरे लिए' को लेकर एक बार फिर भावुक और गौरवान्वित नजर आए। सुभाष घई ने कहा कि रिलीज के 4 दशक बाद भी यह गाना हर राष्ट्रीय पर्व और देशभक्ति कार्यक्रम की पहली पसंद बना हुआ है। मोहम्मद अज़ीज़ और कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में रचे गए इस गीत की प्रासंगिकता आज भी वैसी ही बनी हुई है।

Aug 10, 2026 - 12:44
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'कर्मा' के आइकॉनिक गाने पर सुभाष घई को गर्व; बोले— "आज भी हर नेशनल इवेंट में गूंजती है यह धुन"

मुंबई। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने कई तरह के देशभक्ति गीत रिलीज किए, जिनमें से कुछ ने लोगों के दिलों में जगह बनाई है। ऐसी गाना 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' आज भी स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर गाया जाता है, जिसे देखते हुए निर्देशक-निर्माता सुभाष घई ने सोमवार को खुशी और गर्व जताया।

यह गाना फिल्म कर्मा में फिल्माया गया था। सुभाष घई ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म कर्मा का पोस्टर शेयर करते हुए अपनी दिली इच्छा जाहिर की। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि गाने को संस्कृत में भी रिलीज किया गया था।

उन्होंने लिखा, "जब हमारी फिल्म कर्मा का म्यूजिक एल्बम रिलीज हुआ था तो उस पर सभी स्टार्स के साथ-साथ लक्ष्मीकांत प्यारेलाल और आनंद बख्शी के भी सिग्नेचर थे। ये 1986 में हुआ था। उस एल्बम में एक नेशनल आइकॉनिक गाना 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' आज भी ये गाना भारत के हर नेशनल इवेंट में गाया जाता है।"

उन्होंने लिखा, "अब मुक्ता आर्ट को गर्व है कि हमने इसी गाने को संस्कृत में रिलीज किया है। इसे गाया है कविता कृष्णमूर्ति जी ने और यूट्यूब पर लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। इस आइकॉनिक गाने का आनंद लेने के लिए सबका धन्यवाद।"

1986 में रिलीज हुई फिल्म 'कर्मा' में फिल्माया गया प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' का हिंदी संस्करण लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीतबद्ध किया, आनंद बख्शी ने लिखा और मोहम्मद अजीज व कविता कृष्णमूर्ति ने गाया था।

प्रसिद्ध देशभक्ति गीत 'दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए' का संस्कृत संस्करण अगस्त 2023 में लॉन्च किया गया था। निर्देशक सुभाष घई ने इस कालजयी गाने को संस्कृत भाषा में तैयार करवाया, जिसे मूल गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने ही अपनी आवाज दी थी।

 इनपुट : आईएएनएस

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