श्रावण मास के पहले सोमवार को पुरा महादेव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
- पहली बार श्रद्धालुओं को जलहरी से कराया गया जलाभिषेक
- दिल्ली, हरियाणा, मेरठ, शामली से श्रद्धालु पहुंचे जलाभिषेक करने
बागपत। श्रावण मास के पहले सोमवार को ऐतिहासिक पुरा महादेव परशुरामेश्वर मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा था। भगवान आशुतोष के जलाभिषेक के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर के बाहर लंबी कतारें लग गई और चारों तरफ हर-हर महादेव व बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए इस बार प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए थे। पहली बार श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश कराकर जलाभिषेक कराने के बजाय बाहर से ही जलहरी के माध्यम से भगवान शिव का अभिषेक कराया गया था। व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग की गई और श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्ग से दर्शन व जलाभिषेक कराया गया।
मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की कमान एसपी सूरज राय, डीएम अस्मिता लाल समेत अन्य अधिकारियों ने संभाली। मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से भी लगातार निगरानी की गई।
दिल्ली, हरियाणा, मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर समेत कई जिलों से शिव भक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर पुरा महादेव पहुंचे थे। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर भगवान शिव को जल अर्पित किया। प्रशासन की ओर से पेयजल, चिकित्सा और यातायात व्यवस्था समेत कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित जय भगवान शर्मा ने बताया था कि श्रावण मास की शिवरात्रि पर करीब 40 लाख शिव भक्तों के जलाभिषेक के लिए पहुंचने की संभावना है। सावन के पहले सोमवार को मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक रही और प्रशासनिक अधिकारी लगातार व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे।
मंदिर की मान्यता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुरा महादेव मंदिर का संबंध भगवान परशुराम से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने हरिद्वार की हर की पैड़ी से गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। इसी परंपरा के बाद कांवड़ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है।
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