Satluj के लेखक नीरेन भट्ट का 'राष्ट्रविरोधी' आरोपों पर पलटवार: कहा- 'अगर द कश्मीर फाइल्स बन सकती है, तो हमारी फिल्म पर ही निशाना क्यों?'
लेखक नीरेन भट्ट ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक 'सतलुज' (पहले पंजाब '95) को ZEE5 से हटाए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरल स्टोरी' जैसी फिल्मों का हवाला देते हुए पूछा कि सुरक्षा और राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग का हवाला देकर सिर्फ उनकी फिल्म को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
मुंबई: मशहूर पटकथा लेखक नीरेन भट्ट ने स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ZEE5 से फिल्म 'सतलुज' (Satluj) (जिसका पुराना नाम 'पंजाब '95' था) को अचानक हटाए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। फिल्म पर लगे 'राष्ट्रविरोधी' और सुरक्षा संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने सरकार और सिस्टम की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हाल ही में रिलीज हुई विवादित फिल्मों का उदाहरण देते हुए नीरेन भट्ट ने प्रशासन की आशंकाओं पर खुलकर बात की:
"यह तर्क पूरी तरह से बेतुका है। अगर 'द कश्मीर फाइल्स' (The Kashmir Files) और 'द केरल स्टोरी' (The Kerala Story) जैसी फिल्में बिना किसी रोक-टोक के अस्तित्व में रह सकती हैं, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय ताकतों का टूल या राष्ट्रविरोधी नहीं माना जाता। फिर सिर्फ हमारी ही फिल्म को क्यों चुना गया कि इसका चरमपंथी तत्वों द्वारा दुरुपयोग किया जाएगा? आप सिर्फ एक सीधी-सादी जीवनी (Biography) को दबाने के लिए इस तरह के काल्पनिक और बेबुनियाद निष्कर्ष नहीं निकाल सकते।"
क्यों विवादों में है फिल्म 'सतलुज'?
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संवेदनशील विषय: दिलजीत दोसांझ स्टारर यह फिल्म पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनकी रहस्यमयी मौत पर आधारित एक बायोग्राफिकल ड्रामा है। 1990 के दशक में, खालरा ने पंजाब में उग्रवाद के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के दौरान लगभग 25,000 अज्ञात लोगों के अवैध रूप से किए गए अंतिम संस्कार (extrajudicial cremations) के मामलों को उजागर किया था।
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सेंसर बोर्ड के साथ 4 साल की जंग: यह फिल्म पिछले चार सालों से केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के साथ एक लंबी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ रही थी।
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रिलीज और अचानक बैन: चूंकि ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म सीधे तौर पर सेंसर बोर्ड (CBFC) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, इसलिए फिल्म को अचानक नए नाम 'सतलुज' के साथ ZEE5 पर रिलीज कर दिया गया था। हालांकि, रिलीज के महज दो दिन के भीतर ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। सरकारी सूत्रों ने इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और "सुरक्षा चिंताओं" का हवाला देते हुए आशंका जताई थी कि इस कहानी का वैश्विक स्तर पर भारत विरोधी तत्वों द्वारा गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
पटकथा लेखक नीरेन भट्ट ने जोर देकर कहा कि 'सतलुज' मूल रूप से एक आम आदमी के मानवाधिकारों की लड़ाई की कहानी है, जो पीड़ित परिवारों को डेथ सर्टिफिकेट दिलाने के लिए लड़ रहा था ताकि वे अपने बैंक खाते और जमीन का हक पा सकें। उन्होंने साफ किया कि फिल्म निर्माता इस मामले को अदालत में ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि फिल्म को न्याय मिलेगा, ठीक वैसे ही जैसे अतीत में 'उड़ता पंजाब' को मिला था।
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