यही परीक्षा की घड़ी है, कार्यकर्ता रखें संयमः नरोत्तम मिश्रा

Jul 12, 2026 - 16:05
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यही परीक्षा की घड़ी है, कार्यकर्ता रखें संयमः नरोत्तम मिश्रा
Narottam Mishra

मध्य प्रदेश: दतिया में टिकट मिलने के बाद भड़की बगावत की आग के बीच बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का बेहद अहम और शांत रुख सामने आया है. डबरा से भोपाल के लिए ट्रेन से रवाना हुए पूर्व गृहमंत्री ने 'आजतक' से खास बातचीत में स्पष्ट किया कि वे संगठन के निर्णय के साथ खड़े हैं. दतिया में चल रहे चक्काजाम, तोड़फोड़ और पेट्रोल-मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह की कोशिशों के विजुअल्स पर चिंता जताते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाया.

इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि दतिया से आशुतोष तिवारी को टिकट दिए जाने के फैसले को वे कैसे देखते हैं, जबकि वे खुद इकलौते दावेदार माने जा रहे थे, तो नरोत्तम मिश्रा ने बेहद सकारात्मक अंदाज में कहा, ''पार्टी का जो भी फैसला होता है, वो हमेशा ठीक ही होता है. उसे अच्छे रूप में ही लेना चाहिए, खराब रूप में नहीं लेना चाहिए, ऐसी मेरी मान्यता है. यह समय हमारे धैर्य और संयम की परीक्षा की घड़ी है. पार्टी फोरम पर अपनी बात रखने का एक तय तरीका होता है, कार्यकर्ताओं को वही तरीका अपनाना चाहिए और पूरी तरह अनुशासित रहना चाहिए.''

सामूहिक इस्तीफों पर बोले- चर्चा करूंगा उनसे दतिया में टिकट कटने के बाद न केवल समर्थक सड़कों पर उतरे, बल्कि बीजेपी के जिला अध्यक्ष सहित पूरी जिला इकाई और पार्षदों ने सामूहिक रूप से पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. इस पर पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि यह कार्यकर्ताओं का उनके प्रति प्रेम और तात्कालिक आवेश है. वे खुद सभी नाराज पदाधिकारियों और जिला अध्यक्ष से बात करेंगे और संगठन के हित में उनके इस्तीफे वापस करवाएंगे. 

नए उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को आशीर्वाद देने के सवाल पर उन्होंने हंसते हुए कहा, "बिल्कुल रहेगा, सभी को क्यों नहीं रहेगा, कैसी बात कर रहे हैं." 

वहीं, सीनियर नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान से सहमति जताते हुए नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वे हमेशा से पार्टी के अनुशासित सिपाही रहे हैं.

पुरानी शायरी पर मिला दिलचस्प जवाब इंटरव्यू के आखिरी पड़ाव में जब रिपोर्टर ने उनके उस मशहूर बयान की याद दिलाई जिसमें उन्होंने कहा था, ''मेरा पानी कम होते देख किनारे पर घर मत बना लेना, मैं समंदर हूं लौटकर जरूर आऊंगा..." क्या आप आज भी इस पर कायम हैं? इस पर नरोत्तम मिश्रा ने मुस्कुराते हुए चुटकी ली और कहा, "अरे भाई! अब आराम से घर बनाएं, क्या दिक्कत है."

अंत में उन्होंने दतिया और मध्य प्रदेश के अपने सभी समर्थकों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यह समय शांति, संयम और सब्र का परिचय देने का है. किसी भी सूरत में कानून-व्यवस्था हाथ में न ली जाए. दे

दतिया टिकट कांड के बाद नरोत्तम मिश्रा से 4 जरूरी सवाल और उनके जवाब:- सवाल: समर्थकों के उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम पर क्या कहेंगे? जवाब; यह क्षणिक आवेश था. जाम और तोड़फोड़ बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, शांति बनाए रखें.

सवाल: दतिया में बाजार बंद और जनता की भावुकता पर? जवाब: मुझे जानकारी मिली है, मैं लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में हूं और चर्चा कर रहा हूं.

सवाल: जिला अध्यक्ष व पदाधिकारियों के सामूहिक इस्तीफे पर? जवाब: मैं उन सभी से निश्चित तौर पर चर्चा करूंगा और उनके इस्तीफे वापस करवाऊंगा.

सवाल: क्या भोपाल में आला नेताओं से मुलाकात होगी? जवाब: अभी तो कोई तय कार्यक्रम नहीं है, अगर किसी से मुलाकात होगी तो निश्चित बताऊंगा.

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