बाल शोषण से संबंधित सामग्री पर कार्रवाई तेज करेगा मेटा, सरकार के साथ हुई चर्चाओं के बाद उठाए सख्त कदम

Aug 18, 2026 - 16:52
0 4
बाल शोषण से संबंधित सामग्री पर कार्रवाई तेज करेगा मेटा, सरकार के साथ हुई चर्चाओं के बाद उठाए सख्त कदम
Meta

नई दिल्ली। अमेरिकी टेक दिग्गज मेटा ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) के प्रसार और दोबारा अपलोड होने की घटनाओं को रोकने के प्रयास तेज कर दिए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम केंद्र सरकार के साथ चल रही चर्चाओं के बीच उठाया जा रहा है, जिसमें अवैध सामग्री के प्रबंधन और डिजिटल मंचों की जिम्मेदारियों पर विशेष जोर दिया गया है। 

एनडीटीवी प्रॉफिट ने रिपोर्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) और मेटा के बीच हुई चर्चाओं का मुख्य फोकस उन अवैध सामग्रियों के प्रबंधन पर रहा है जिन्हें एक बार हटाए जाने के बाद फिर से प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया जाता है। सरकार का मानना है कि केवल सामग्री हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके दोबारा प्रसार को भी रोकना आवश्यक है।

मेटा ने इस दिशा में कई कदम उठाने शुरू किए हैं और कंपनी विशेष रूप से सतर्क है, क्योंकि बाल यौन शोषण सामग्री भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। कंपनी ऐसे मामलों की पहचान, हटाने और पुनः अपलोड को रोकने के लिए अपनी प्रणालियों को और मजबूत कर रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी उन मामलों पर भी काम कर रही है, जिनमें पहले चिन्हित और हटाई जा चुकी सामग्री किसी नए रूप या अलग माध्यम से दोबारा प्लेटफॉर्म पर दिखाई देती है। इसके लिए उन्नत तकनीकी प्रणालियों और पहचान तंत्र का उपयोग किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने मेटा सहित डिजिटल मंचों को स्पष्ट किया है कि यदि वे लागू भारतीय कानूनों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें "सेफ हार्बर" सुरक्षा का लाभ नहीं मिल सकता। यह सुरक्षा सामान्यतः डिजिटल मंचों को उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा की गई सामग्री के लिए सीमित कानूनी संरक्षण प्रदान करती है।

हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप लागू करना नहीं है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि डिजिटल मंच भारतीय कानूनों और नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का मानना है कि डिजिटल मंचों को सामाजिक हित और संभावित नुकसान के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए। विशेष रूप से सोशल मीडिया से जुड़ी लत (एडिक्शन), शोषणकारी सामग्री का प्रसार और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार चिंता का विषय बने हुए हैं।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि सामग्री निगरानी और नियंत्रण नीतियां बनाते समय भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। सरकार चाहती है कि वैश्विक तकनीकी कंपनियां भारतीय संदर्भ को समझते हुए अपनी नीतियों को लागू करें।

सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय अपने कानूनी अधिकारों का सीमित और आवश्यक उपयोग कर रहा है तथा उसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल मंच अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। किसी भी मंच को उपलब्ध कानूनी सुरक्षा बनी रहेगी या नहीं, इसका अंतिम निर्णय अदालतें संबंधित परिस्थितियों और कानूनी अनुपालन के आधार पर करेंगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर के नियामक संस्थान सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों की सामग्री नियंत्रण नीतियों, उपयोगकर्ता सुरक्षा और स्थानीय कानूनों के अनुपालन को लेकर अपनी निगरानी बढ़ा रहे हैं। भारत भी इस दिशा में डिजिटल मंचों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

इनपुट : आईएएनएस

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
KNOCKOUT NEWZ DIGITAL

Welcome to Knockout Newz Website. - Knockout Newz brings you the latest Breaking News, India News, Uttar Pradesh News, cities news, Politics, Trending, Sports, Entertainment, Business and Technology updates. Stay informed with fast, accurate and reliable journalism.

Comments (0)

User