केंद्र सरकार की दो टूक, भारत में अमेरिकी कानून से नहीं चलेगा Meta

Aug 07, 2026 - 11:15
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केंद्र सरकार की दो टूक, भारत में अमेरिकी कानून से नहीं चलेगा Meta
  • केंद्र सरकार ने Meta को भारतीय समाज और भारतीय कानूनों के हिसाब से चलने को कहा.

नई दिल्ली : भारत सरकार ने Meta को चेतावनी दी है कि यहां प्लेटफॉर्म अमेरिकी कानूनों के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता. सरकार का कहना है कि मेटा को भारतीय समाज के हिसाब से काम करना होगा और भारतीय कानूनों के तहत चलना होगा, भारत सरकार ने Meta और बाकी टेक कंपनियों को लेकर अपना रुख और सख्त कर लिया है. केंद्र सरकार ने Meta को साफ शब्दों में कहा है कि भारत में कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म अमेरिकी कानूनों के हिसाब से नहीं चलाया जा सकता. सरकार का मानना है कि बाकी सभी संस्थाओं की तरह इन Social Media प्लेटफॉर्म्स की भी भारतीय समाज और यहां के कानूनों के प्रति पूरी जवाबदेही बनती है. सरकारी सूत्रों ने बताया कि ये पूरी तरह से तकनीकी मामला है और इसके हर पहलू को गहराई से समझना जरूरी है. Meta और सरकार के अधिकारियों के बीच हुई बैठकों में टेक्निकल डिटेल्स और डेटा लॉग्स पर भी विस्तार से चर्चा की गई.

सूत्रों ने बताया कि संविधान का आर्टिकल 19 अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन साथ ही ये तर्कसंगत पाबंदियों का भी प्रावधान करता है. इसी तरह रोजगार से जुड़े अधिकारों पर भी नियम लागू होते हैं. भारत सरकार का मानना है कि समाज विश्वास पर चलता है, इसलिए Digital प्लेटफॉर्म्स को इस भरोसे को हर हाल में बनाए रखना होगा. बैठक के दौरान सरकार ने Internet पर डीपफेक कंटेंट की क्वालिटी में आए सुधार पर भी गंभीर चिंता जताई. सरकार ने बताया कि मेटा के अलावा 'एक्स' और टेलीग्राम जैसे सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ भी इन मामलों को लेकर लगातार बातचीत चल रही है. 

वहीं, दूसरी तरफ Meta के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने अपने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और प्लेटफॉर्म रेगुलेशन में हुई गड़बड़ियों को लेकर माफी मांगी है. मेटा ने माना है कि उसके प्लेटफॉर्म पर कई अवैध कंटेंट को बढ़ावा दिया गया था और एक खास कम्युनिटी तक पहुंच बनाने के लिए पैसे लेकर कंटेंट को बूस्ट किया है. 

इसके साथ ही अधिकारियों ने Meta को साफ कर दिया है कि वो अब सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट के तहत 'इंटरमीडियरी' के दायरे में नहीं आते, क्योंकि वो खुद तय करते हैं कि कंटेंट किसे दिखेगा. इसलिए उन्हें IT एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी 'सेफ हार्बर' का फायदा नहीं दिया जा सकता.

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