घाटा सहकर भी सबसे सस्ती गैस भारत में दी जा रही: पेट्रोलियम मंत्रालय

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, होर्मुज में बाधा और खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच भारत ने एलपीजी आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए... See more

Jun 08, 2026 - 12:46
Updated: 1 month ago
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घाटा सहकर भी सबसे सस्ती गैस भारत में दी जा रही: पेट्रोलियम मंत्रालय
LPG cylinder

- ₹29 महंगे हुए घरेलू सिलेंडर, सरकार ने बताया जायज.

- तीन महीने में दूसरी बार बढ़ें घरेलू सिलेंडर के दाम

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने रसोई गैस की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को जायज ठहराया है. सरकार के मुताबिक, घरेलू LPG सिलेंडर की आपूर्ति पर प्रति सिलेंडर करीब 700 रुपये का घाटा हो रहा है. एक घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि उपभोक्ताओं को यह अब भी 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है. सरकार का दावा है कि भारत में रसोई गैस अब भी दुनिया के सबसे सस्ते दामों पर उपलब्ध है.

सरकार ने कहा है कि भारतीय परिवारों को दुनिया के कई देशों की तुलना में अब भी सस्ती रसोई गैस मिल रही है. भारत में एलपीजी की कीमतें न केवल पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से कम हैं, बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों के मुकाबले भी काफी नीचे हैं.

घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें

भारत (उज्ज्वला): ₹642 भारत

 (बिना सब्सिडी): ₹942

पाकिस्तान: ₹1046

नेपाल: ₹1207

बांग्लादेश: ₹122

5श्रीलंका: ₹1241

अमेरिका: ₹1755

ऑस्ट्रेलिया: ₹1765

कनाडा: ₹2411

तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की है. इसके बाद दिल्ली में सिलेंडर का दाम 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गया है. पिछले तीन महीनों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में यह दूसरी बढ़ोतरी है. इससे पहले 7 मार्च को प्रति सिलेंडर 60 रुपये का इजाफा किया गया था.पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, फरवरी से जून 2026 के बीच एलपीजी के लिए सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) बेंचमार्क में करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. होर्मुज क्षेत्र में बाधाओं के कारण खाड़ी देशों से गैस आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे एलपीजी की लागत में तेज उछाल आया. इसी वजह से घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति लागत बढ़ी और खुदरा कीमतों में संशोधन करना पड़ा.

केंद्र ने स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी पर होने वाली 'अंडर-रिकवरी' सब्सिडी से अलग है. यह अंतरराष्ट्रीय लागत और उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली कीमत के बीच का अंतर होता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी का बोझ पिछले वर्ष लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि उससे एक वर्ष पहले यह 41,338 करोड़ रुपये था.

देश में नहीं होने दी कमी: पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, होर्मुज में बाधा और खाड़ी क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच भारत ने एलपीजी आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए. सरकार के अनुसार, देश की करीब 54 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति इसी मार्ग से आती है, लेकिन संकट के दौरान भी पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं होने दी गई. घरेलू एलपीजी उत्पादन को 32 हजार मीट्रिक टन (टीएमटी) से बढ़ाकर 52 टीएमटी किया गया, जबकि अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी वैकल्पिक आपूर्ति सुनिश्चित की गई. साथ ही, एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिए ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन को करीब 90 प्रतिशत तक बढ़ाया गया. सरकार ने कहा कि इन उपायों से देशभर में गैस की आपूर्ति और वितरण सामान्य बना रहा.

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