श्रमिकों के लिए रसोई गैस की समस्या बनी मुसीबत
- रसोई गैस की किल्लत बरकरार.
Sanjay Knockout | देश के अधिकतर राज्यों में रसोई गैस की किल्लत बरकरार है। मुख्य रूप से श्रमिक तबकों के लिए ज्यादा मुसीबत है। श्रमिक वर्ग छोटे सिलिंडर पर आश्रित है। इन सिलिंडरों में छोटे दुकानदार ही रिफिलिंग करते हैं। पहले एक किलो गैस 90, रुपए में भरा जाता था और अब 200-250, में भरा जाने लगा है।
ऐसे में श्रमिकों को रसोई गैस भरवाने में काफी खर्च करने के कारण मुश्किलें बढ़ गई हैं।कई लोगों के घरों में चूल्हे पर खाना बन रहा है। उम्रदराज महिलाएं चूल्हे पर खाना बना लेती हैं। तीस और पच्चीस साल की युवतियां चूल्हे पर खाना नहीं बना पातीं।
एक कामगार महिला मुनेश ने बातचीत के दौरान बताया कि भईया बहू को चूल्हे पर खाना बनाना सीखा रही हूं। इसलिए काम पर आने में विलंब हो रहा है।कई जिलों में रसोई गैस की आपूर्ति अभी भी सामान्य नहीं हो पाई है।
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