उरुग्वे में अपना पूर्ण दूतावास खोलेगा भारत; 75 साल बाद द्विपक्षीय संबंध पहुंचे ऐतिहासिक मोड़ पर, राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो का बड़ा बयान

भारत और लैटिन अमेरिकी देश उरुग्वे के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर भारत ने उरुग्वे की राजधानी मोंटेवीडियो में अपना पहला पूर्ण और स्वतंत्र दूतावास (Resident Embassy) खोलने का बड़ा फैसला लिया है। भारत में उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो (Alberto Antonio) ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध अब एक नए और अभूतपूर्व मोड़ पर पहुंच गए हैं। जानिए भारत-उरुग्वे संबंधों के 75 साल के सफर और नए दूतावास से जुड़े रणनीतिक महत्व की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Aug 26, 2026 - 12:25
0 0
उरुग्वे में अपना पूर्ण दूतावास खोलेगा भारत; 75 साल बाद द्विपक्षीय संबंध पहुंचे ऐतिहासिक मोड़ पर, राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो का बड़ा बयान

नई दिल्ली। विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने ओरिएंटल रिपब्लिक ऑफ उरुग्वे के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर भारत में दक्षिण अमेरिकी देश उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमरिला भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद राजदूत अमरिला ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत की।  

उन्होंने बताया कि भारत उरुग्वे में दूतावास खोलने जा रहा है। दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 साल पहले ही पूरे हो चुके हैं और अब ये संबंध अहम मोड़ पर आ चुके हैं। हम दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर बहुत उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि हम पहले ही अपने दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्तों के 75 साल पूरे होने का जश्न मना चुके हैं। साथ ही, हम एक अहम मोड़ पर हैं, क्योंकि भारत उरुग्वे में एक दूतावास खोलने जा रहा है। हमें इससे बहुत उम्मीदें हैं, खासकर इसलिए क्योंकि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने की उम्मीद है।

उन्होंने आगे कहा कि हम अपने राष्ट्रपति यामांडू ओरसी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच गर्मजोशी से भरे रिश्ते को देखने के लिए भी उत्सुक हैं। वे पिछले साल ब्राजील में मिले थे और हमें उम्मीद है कि हमारे राष्ट्रपति को भारत आने का मौका मिलेगा और प्रधानमंत्री को भी उरुग्वे आने का अवसर मिलेगा।

राजदूत अमरिला ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत अहम योगदान दिया है। उन्होंने विकासशील देशों का जोरदार समर्थन किया और ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे दक्षिण अमेरिका और भारत के बीच जुड़ाव को मजबूत करने में मदद मिली है। ब्राजील और अर्जेंटीना के उनके दौरे बहुत जरूरी रहे हैं और हमें उम्मीद है कि ऐसा जुड़ाव बढ़ता रहेगा। अभी, भारत और दक्षिण अमेरिका के बीच व्यापार लगभग 50 बिलियन डॉलर का है और हमें उम्मीद है कि 2030 तक यह लगभग 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। हमें भरोसा है कि हमारे इलाकों के बीच जबरदस्त तालमेल है और सहयोग के कई मौके हैं। मेरा मानना ​​है कि यह तो बस शुरुआत है।

ग्लोबल लीडर के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी की छवि को लेकर उन्होंने कहा, "उनकी छवि बहुत सकारात्मक है। प्रधानमंत्री ने दुनिया को एक परिवार की तरह देखने के विचार को बढ़ावा दिया है। उन्होंने लगातार वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर फोकस किया और शांति के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता बनाए रखी है। मेरा मानना ​​है कि उन्होंने खुद को पहले ही एक ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थापित कर लिया और दुनियाभर में कई लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं कि उनके योगदान से सभी के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने में मदद मिलेगी।"

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को लेकर उन्होंने कहा, "भारत की तरह, उरुग्वे भी शांति को महत्व देने वाला देश है। हम देशों के बीच झगड़ों का समर्थन नहीं करते हैं। हमारा मानना ​​है कि मतभेदों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए, और हम पूरी उम्मीद करते हैं कि ये तनाव जल्द ही खत्म हो जाएंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "इसमें कोई शक नहीं है कि तेल अभी भी एक बहुत जरूरी एनर्जी रिसोर्स है। हालांकि, हमारा यह भी मानना ​​है कि ऊर्जा के नवीकरणीय संसाधनों में निवेश करना और उनकी तरफ जाना जरूरी है। ऐसा करने से उन रिसोर्स पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है जो अक्सर झगड़े की वजह बन जाते हैं और ज्यादा सस्टेनेबल और शांतिपूर्ण भविष्य में मदद कर सकते हैं।"


इनपुट : आईएएनएस

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User