CCSU के 38वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल बोलीं- विवि हॉस्टलों में ड्रग्स सप्लाई हो रही; कुलपतियों को फोटो दिखा चुकी हूं
CCSU 38th convocation ceremony
- CCSU के 38वें दीक्षांत समारोह में पहुंचीं थीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल.
मेरठ: बुधवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शामिल हुईं। उन्होंने 199 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के हॉस्टल्स में ड्रग सप्लाई किए जाने और शराब की बोतलें पड़ी मिलने का दावा किया।
राज्यपाल ने कहा- मैंने लगभग 15 विश्वविद्यालयों के हॉस्टल देखे हैं। वहां बाहर शराब की बोतलें पड़ी मिलीं। हॉस्टलों में बाहर से जो खाना आता है, उसके जरिए ड्रग्स भी पहुंच रहा है। मैंने हॉस्टल प्रबंधन और कुलपतियों को इसकी तस्वीरें तक दिखाई हैं।
राज्यपाल ने कहा कि हम तो चार पीढ़ियों से चाय तक नहीं पी रहे और आप ड्रग्स के आदी हो गए हैं। इसे छोड़िए। नशा कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। यह धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, प्रतिभा, स्वास्थ्य और परिवार की उम्मीदों को नष्ट कर देता है।
राज्यपाल ने बताया कि हकीकत जानने के लिए वह ट्रेन से सफर कर रहीं हैं। ट्रेन और ट्रैक पर गंदगी को लेकर वह अधिकारियों को फोटो भी शेयर कर चुकी हैं।

पढ़िए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के स्पीच की प्रमुख बातें...
1- युवाओं को पता नहीं और झंडा लेकर निकल जाते
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा- आज के कई युवाओं को यह नहीं पता कि उन्हें क्या करना है। कोई एक झंडा लेकर निकल पड़ता है, दूसरा उसके पीछे चल पड़ता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि हम जो कर रहे हैं, वह देशहित में है या नहीं। बच्चों को उन महापुरुषों के बारे में जरूर बताया जाना चाहिए, जिनके नाम पर विश्वविद्यालय का नाम रखा गया है।
2- परिवार में तीन बेटियां होने पर परिवार में मच जाता हाहाकार
आज यहां 75 प्रतिशत बेटियों और 25 प्रतिशत छात्रों को मेडल मिले हैं। जरा सोचिए, हम बेटों के पीछे भागते हैं। तीन बेटियां होने पर कई परिवारों में हाहाकार मच जाता है, जबकि बेटियां बेहद होनहार हैं। उन पर भरोसा कीजिए। वे परिवार का नाम रोशन करेंगी। बेटा हो या बेटी, दोनों के चरित्र निर्माण पर समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
3- डी.लिट. का दायरा बढ़े
डी.लिट. की उपाधि ऐसे लोगों को भी मिलनी चाहिए, जो भले औपचारिक रूप से अधिक पढ़े-लिखे न हों, लेकिन किसी कला या कौशल में महारत रखते हों। गांवों में कई महिलाएं लोगों को आत्मनिर्भर बना रही हैं। ऐसे महिला-पुरुष भी इस सम्मान के हकदार हैं।
4- शिक्षक किताबें नहीं लिख रहे
हमने एक शिक्षक से पूछा कि उन्होंने कितनी किताबें लिखी हैं। उन्होंने बताया- दो। जब पूछा कि कितने वर्षों से पढ़ा रहे हैं, तो जवाब मिला- 20 साल से। 20 वर्षों में सिर्फ दो किताबें नहीं, बल्कि कम से कम पांच किताबें लिखनी चाहिए।
5- ट्रेन से सफर कर देख रही हूं व्यवस्था
आजकल मैं ट्रेन से सफर कर रही हूं, ताकि रेलवे ट्रैक के किनारे साफ-सफाई की व्यवस्था देख सकूं। कानपुर जाते समय मैंने ट्रैक पर जलभराव और गंदगी देखी। मैंने उसकी फोटो और वीडियो लेकर रेलवे अधिकारियों को दिखाए। रेलवे अधिकारियों ने इसके बाद सफाई कराई। फिर मैंने नगर निगम के अधिकारियों से पूछा कि यह पानी कहां से आ रहा है। उनसे कहा कि अगली बार आने पर इसकी पूरी जानकारी दी जाए।
6- नई तकनीक में युवाओं की भूमिका
राज्यपाल ने कहा- देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन बनाई गई है। इसका डिजाइन भी आप जैसे युवाओं ने तैयार किया है। हमें इसी तरह आगे बढ़ना है। विश्वविद्यालयों में अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रम होने चाहिए। गगनयान मिशन के तहत तीन लोगों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।
आसमान से बिजली क्यों गिरती है और उससे लोगों को कैसे बचाया जाए? समुद्र में ऊंची लहरें क्यों उठती हैं, जिनसे जहाज डूब जाते हैं? इन विषयों पर इसरो काम कर रहा है और इसमें भी युवा वैज्ञानिकों की बड़ी भूमिका है। डीआरडीओ ने लड़ाकू विमान तैयार किए हैं। ऐसे 225 विमान बनाए जा रहे हैं और इसमें भी आप जैसे युवाओं का योगदान है।
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