Bullet Train India: जानें मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल की पूरी ABCD
नई दिल्ली: मुंबई-अहमदाबाद Bullet Train 15 अगस्त 2027 से सूरत-विलिमोरा के बीच चलने वाली है. लेकिन, इस हाईस्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है. खासकर इसकी स्पीड, बनावट और टेक्नोलॉजी को लेकर.
मुंबई अहमदाबाद Bullet Train निर्माण की रफ्तार तेज हो चुकी है और 15 अगस्त 2027 तक सूरत से विलिमोरा तक इसका उद्घाटन भी हो जाएगा. लेकिन, क्या आपको पता है कि Bullet Train कितने करोड़ रुपये में तैयार होती है. इसके एक कोच को तैयार करने में कितनी लागत होती है. इसमें 30 से 35 करोड़ रुपये खर्च प्रति कोच का आता है. जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 से 16 डिब्बों वाली एक जापानी शिंकानसेन (Shinkansen) Bullet Train रैक बनाने में लगभग 350 से 460 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है. जबकि भारत में इस्तेमाल B 28 कोच की लागत प्रति डिब्बे 300 से 320 करोड़ रुपये तक आंकी गई है.
Bullet Train में एयरोडायनामिक बॉडी
Bullet Train में 320 किमी प्रति घंटे की तेज रफ्तार के दबाव को झेलने वाली एयरोडायनामिक बॉडी और एडवांस्ड सेफ्टी टेक्नोलॉजी भी होती है. Bullet Train में ऑटोमैटिक सिग्नल, सुरंगों में हवा के दबाव से बचाने के लिए प्रेशर सील कैब इस्तेमाल की जाती है. हालांकि, Bullet Train सेट बहुत छोटा खर्च है. Bullet Train प्रोजेक्ट में एलिवेटेड ट्रैक, समुद्र/पहाड़ के नीचे सुरंगें, हाई वोल्टेज OHE केबल और रेलवे स्टेशन का निर्माण भी शामिल होता है. वहीं मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की पूरी लागत 1.98 लाख करोड़ रुपये से सवा दो लाख करोड़ रुपये तक आंकी गई है. यानी प्रति किलोमीटर करीब 390 करोड़ रुपये खर्च आएगा.
- 508 किमी मुंबई-अहमदाबाद पहली बुलेट ट्रेन
- 1.08 लाख करोड़ से 1.25 लाख करोड़ तक
- 200 प्रति किमी खर्च हाईस्पीड रेल कॉरिडोर ट्रैक का
Bullet Train का रूट एलिवेटेड
चीन, जापान समेत ज्यादातर जगहों पर Bullet Train रूट का लगभग 90 फीसदी से अधिक हिस्सा जमीन से ऊपर पर बनता है. समुद्र के नीचे और पहाड़ियों में स्पेशल टनल भी बनाई जाती है.जापानी शिंकानसेन टेक्नोलॉजी में सिग्नलिंग, ट्रैक बैड और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम के साथ भूमि अधिग्रहण और स्टेशन निर्माण में काफी खर्च होता है.
Bullet Train में इंजन क्यों नहीं होता
Bullet Train में अलग से कोई लोकोमोटिव इंजन नहीं होता है. साधारण ट्रेनों में एक भारी इंजन पीछे के सभी डिब्बों को खींचता है. लेकिन, Bullet Train में इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट तकनीक से ताकत हासिल करती है. Bullet Train में अलग से इंजन के बजाय ट्रेन के डिब्बों के नीचे ही छोटे और बहुत शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर लगे होते हैं. जैसे जापान की शिंकानसेन ट्रेन में लगभग हर डिब्बों की बोगी के नीचे अपनी मोटरें लगी होती हैं.
Bullet Train को बिजली कहां से मिलती है
ट्रेन की छत पर 1 या 2 पेंटोग्राफ होते हैं, जो ऊपर से गुजर रहे हाई वोल्टेज बिजली की तारों से ऊर्जा लेते हैं. यह बिजली पूरी ट्रेन में नीचे लगे ट्रांसफार्मर और इनवर्टर के माध्यम से डिब्बों की मोटरों तक पहुंचती है. अलग-अलग बोगियों को मोटर से पावर मिलने के कारण Bullet Train कुछ सेकेंड के भीतर ही 300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है. ट्रेन के आगे भारी इंजन से पूरे ट्रैक पर एक ही जगह भार पड़ता है. पटरियां जल्द खराब होती हैं. जबकि अलग-अलग कोच में मोटर लगने से वजन पूरी ट्रेन पर बराबर बंट जाता है. ब्रेक लगाने पर ट्रेन की मोटरें ब्रेक से निकलने वाली ऊर्जा को वापस बिजली बनाकर ग्रिड में भेज देती हैं. भारी इंजन न होने से ट्रेन के पहले और आखिरी डिब्बे में भी यात्रियों के बैठने की जगह रहती है.
बत्तख जैसी चोंच वाला पहला डिब्बा
Bullet Train का पहला डिब्बा आगे से लंबा और बत्तख की चोंच जैसा होता है, लेकिन उसमें सिर्फ ड्राइवर की जगह होती है. होता है, कोई विशालकाय इंजन नहीं। बाकी पूरी ट्रेन खुद ही अपने पहियों की मोटरों से चलती है. Bullet Train हाईस्पीड रेल सामान्य ट्रेनों से पूरी तरह अलग तकनीक और डिजाइन पर काम करती है. भारत में मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के लिए जापान की E5 सीरीज शिंकानसेन तकनीक पर ट्रेन सेट का इस्तेमाल होता है.
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