AI डीपफेक के खिलाफ प्रीति जिंटा को बड़ी राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मॉर्फ्ड कंटेंट और फर्जी वीडियो पर लगाया अंतरिम प्रतिबंध

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट के खिलाफ बड़ी अंतरिम राहत दी है। अदालत ने बिना अनुमति के उनके नाम, चेहरे, आवाज और डिजिटल पहचान का व्यावसायिक या गलत इस्तेमाल करने वाली वेबसाइटों और सोशल मीडिया हैंडल्स पर रोक लगा दी है।

Jul 09, 2026 - 11:31
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AI डीपफेक के खिलाफ प्रीति जिंटा को बड़ी राहत, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मॉर्फ्ड कंटेंट और फर्जी वीडियो पर लगाया अंतरिम प्रतिबंध

मुंबई: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक (Deepfake) तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग के खिलाफ फिल्म जगत की एक और बड़ी हस्ती ने कानूनी जंग जीत ली है। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और किंग्स इलेवन पंजाब की सह-मालकिन प्रीति जिंटा (Preity Zinta) के पक्ष में एक ऐतिहासिक अंतरिम आदेश पारित किया है। अदालत ने इंटरनेट पर उनके चेहरे, आवाज और नाम का इस्तेमाल कर बनाए जा रहे आपत्तिजनक मॉर्फ्ड कंटेंट और फर्जी विज्ञापनों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

प्रीति जिंटा ने अपने 'व्यक्तित्व अधिकारों' (Personality Rights) और प्राइवेसी की रक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने उन्हें यह अंतरिम राहत प्रदान की है।

क्या है पूरा मामला और अदालत का आदेश?

हाल के दिनों में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई ऐसी वेबसाइट्स और अज्ञात सोशल मीडिया अकाउंट्स सामने आए थे, जो AI तकनीक का गलत इस्तेमाल कर प्रीति जिंटा के चेहरे और नकली आवाज (Voice Cloning) के जरिए भ्रामक कंटेंट और अवैध कमर्शियल विज्ञापन बना रहे थे। इससे न केवल आम जनता गुमराह हो रही थी, बल्कि अभिनेत्री की प्रतिष्ठा को भी गंभीर ठेस पहुंच रही थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:

"किसी भी व्यक्ति, डिजिटल प्लेटफॉर्म या तकनीकी माध्यम को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी सेलिब्रिटी की सहमति के बिना उनके नाम, छवि, आवाज या डिजिटल पहचान का व्यावसायिक लाभ के लिए दुरुपयोग करे। प्रथम दृष्टया यह मामला याचिकाकर्ता के अधिकारों का उल्लंघन करता है, इसलिए ऐसी सभी सामग्रियों और लिंक्स को तुरंत ब्लॉक या डिलीट किया जाए।"

डिजिटल पहचान और व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा

अदालत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) और प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे प्रीति जिंटा से जुड़े ऐसे सभी डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट वाले यूआरएल (URLs) को इंटरनेट से हटाएं।

प्रीति जिंटा से पहले अनिल कपूर, अमिताभ बच्चन और जैकी श्रॉफ जैसे दिग्गज कलाकार भी दिल्ली और बॉम्बे हाई कोर्ट से अपने पर्सनल और पब्लिसिटी राइट्स को सुरक्षित करने के लिए इसी तरह के सुरक्षात्मक आदेश (John Doe Orders) हासिल कर चुके हैं।

सेलिब्रिटीज के लिए बढ़ता खतरा बना डीपफेक

सिनेमा और खेल जगत के सितारों के लिए डीपफेक तकनीक पिछले कुछ समय से एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। रश्मिका मंदाना, आलिया भट्ट और कैटरीना कैफ जैसी अभिनेत्रियां भी इस तकनीक का शिकार हो चुकी हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बॉम्बे हाई कोर्ट का प्रीति जिंटा के पक्ष में आया यह फैसला देश में डिजिटल राइट्स और एआई के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक और मजबूत कदम साबित होगा।

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