Awarapan 2 Movie Review: इमरान हाशमी की दमदार परफॉर्मेंस, लेकिन मोहित सूरी वाले इमोशनल टच की खली कमी; जानें कैसी है 'आवारापन 2'
इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित सीक्वल 'आवारापन 2' (Awarapan 2) सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। फ़िल्म एक बार देखने लायक (Decent Watch) जरूर है, लेकिन यह 2007 की मूल फ़िल्म जैसी भावनात्मक गहराई और इंटेंसिटी पैदा करने में थोड़ी पीछे रह जाती है। मूल निर्देशक मोहित सूरी की गैर-मौजूदगी डार्क और इमोशनल सीन्स में साफ महसूस होती है, हालांकि इमरान हाशमी का अभिनय एक बार फिर बेमिसाल और त्रुटिहीन (Flawless) साबित हुआ है।
मुंबई: साल 2007 में आई मोहित सूरी निर्देशित 'आवारापन' को हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन और भावनात्मक गैंगस्टर ड्रामा फ़िल्मों में गिना जाता है। ऐसे में जब इसके सीक्वल 'आवारापन 2' (Awarapan 2) की घोषणा हुई थी, तो दर्शकों और समीक्षकों की उम्मीदें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। फ़िल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और यह एक औसत से बेहतर यानी 'डीसेंट वॉच' (Decent Watch) साबित होती है, हालांकि मूल फ़िल्म का जादू पूरी तरह दोहरा पाने में चूक जाती है।
कहानी और इमोशनल टोन: जहां खली मोहित सूरी की कमी
'आवारापन 2' की सबसे बड़ी चुनौती इसकी मूल फ़िल्म द्वारा सेट किए गए ऊंचे मानकों से मुकाबला करना था:
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मोहित सूरी का विजन मिसिंग: फ़िल्म देखते समय मूल निर्देशक मोहित सूरी (Mohit Suri) की अनुपस्थिति स्पष्ट रूप से खलती है। डार्क, इंटेंस और रूह को छू लेने वाले दर्द भरे पलों को पर्दे पर उतारने में नया निर्देशन उतना प्रभावशाली नजर नहीं आता।
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भावनात्मक गहराई में कमी: 2007 की फ़िल्म में जहां 'शिवम' का दर्द और पश्चाताप दर्शकों की आंखों में आंसू ला देता था, वहीं सीक्वल में इमोशनल कनेक्ट उतना गहरा नहीं बन पाता।
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उम्मीदों का दायरा: यह कोई बुरी सीक्वल नहीं है, लेकिन थिएटर जाने से पहले दर्शकों को अपनी अपेक्षाएं (Expectations) बहुत अधिक नहीं रखनी चाहिए।
इमरान हाशमी का अभिनय: पूरी तरह त्रुटिहीन और बेमिसाल (Flawless)
फ़िल्म की कमजोरियों के बावजूद, जो एक चीज इसे पूरी तरह बांधकर रखती है, वह है इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) का शानदार अभिनय:
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शिवम का वही दर्द और ठहराव: इमरान हाशमी ने साबित कर दिया है कि 'शिवम पंडित' का किरदार केवल वही निभा सकते हैं। उनकी आंखों की खामोशी, डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेजेंस फ़िल्म के हर फ्रेम को ऊंचा उठाती है।
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वन मैन शो: इमरान का समर्पण और उनकी परिपक्व एक्टिंग ही इस सीक्वल की सबसे बड़ी ताकत है। वे हर कमजोर सीन को भी अपने दम पर संभालते हुए नजर आते हैं।
तकनीकी पक्ष और संगीत
फ़िल्म की सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीन्स ठीक-ठाक हैं। बैकग्राउंड स्कोर कहीं-कहीं मूल फ़िल्म की याद दिलाता है, लेकिन गानों के मामले में यह पुरानी फ़िल्म के एवरग्रीन चार्टबस्टर्स (जैसे 'तेरा मेरा रिश्ता' या 'तो फिर आओ') जैसा ऐतिहासिक प्रभाव छोड़ने में थोड़ी कमजोर साबित होती है।
फ़ैसला (Final Verdict)
'आवारापन 2' एक ऐसी फ़िल्म है जिसे इमरान हाशमी के जबर्दस्त अभिनय के लिए बिल्कुल देखा जा सकता है। यदि आप मूल फ़िल्म जैसी अत्यधिक इमोशनल गहराई की उम्मीद नहीं लगाते हैं, तो यह सीक्वल आपका अच्छा मनोरंजन करेगी।
रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5 स्टार)
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