राम मंदिर में चंदा चोरी पर अखिलेश का SIT पर तंज; सपा प्रमुख बोले- कही जांच रिपोर्ट न हो जाए चोरी

अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि मामले में बड़े लोगों के नाम शामिल हैं, इसलिए सरकार और प्रशासन पूरी तरह से चुप है.

Jun 22, 2026 - 12:33
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राम मंदिर में चंदा चोरी पर अखिलेश का SIT पर तंज; सपा प्रमुख बोले- कही जांच रिपोर्ट न हो जाए चोरी
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव

लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर चंदा घोटाले की जांच कर रही SIT पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा व्यंग्य किया है. अखिलेश यादव ने विशेष जांच दल (SIT) को सचेत करते हुए तंज कसा है कि वह ध्यान रखें कि कहीं इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर चल रही चंदा चोरी की बहस के बीच एसआईटी की कार्यप्रणाली पर बड़ा तंज कसा है. उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में सीधे तौर पर जांच एजेंसी को आगाह किया कि एसआईटी को बहुत सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि जिस तरह से चीजें चल रही हैं, कहीं जांच की रिपोर्ट ही गायब या चोरी न हो जाए. अखिलेश ने आगे लिखा कि फिर कहेंगे 15 दिन और इंतजार कर लो. दिन इसलिए बढ़ा रहे हैं, क्योंकि सबूत ठिकाने लगा रहे हैं.

इससे पहले VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अलोक कुमार ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा था कि वो राम मंदिर के मुद्दे को चुनावी हथियार बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर उनके पास सबूत हैं तो वह SIT के सामने पेश होकर सबूत दें. आलोक कुमार कहा, 'उन्हें (SP प्रमुख अखिलेश यादव) भगवान राम से कोई सहानुभूति नहीं है, वो चुनाव जीतना चाहते हैं. वे राम मंदिर के लिए चंदे के मुद्दे का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रहे हैं. हम जांच से पीछे नहीं हटेंगे. उन्हें SIT के सामने पेश होकर सबूत देने चाहिए और अगर वो SIT के सामने पेश नहीं होते और सबूत नहीं देते हैं तो यह माना जाएगा कि उनकी बातें सिर्फ़ दिखावा थीं और उनमें ईमानदारी की कमी थी. 

बता दें कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित करोड़ों रुपये के चंदे के गबन का मामला सामने आया है. ट्रस्ट ने मामले की जांच के लिए खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एआईटी गठन की मांग की थी. SIT गठित हो चुकी है और जांच शुरू हो गई है. पहले चंपत राय SIT के सामने पेश भी हो चुके हैं. अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि मामले में बड़े लोगों के नाम शामिल हैं, इसलिए सरकार और प्रशासन पूरी तरह से चुप है.

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