तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला; महिला कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के लिए भी मिलेगी 1 साल की पूरी मैटरनिटी लीव

तमिलनाडु सरकार ने राज्य की महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए तीसरे बच्चे के जन्म पर भी पूरे एक साल (365 दिन) का सवेतन अवकाश देने की घोषणा की है। जानिए तमिलनाडु सरकार के इस नए फैसले से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।

Aug 19, 2026 - 14:06
Updated: 6 days ago
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तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला; महिला कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के लिए भी मिलेगी 1 साल की पूरी मैटरनिटी लीव
Tamil Nadu Extends 1-Year Maternity Leave For Third Child

चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के कल्याण और मातृत्व सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और अभूतपूर्व नीतिगत फैसला लिया है। राज्य सरकार ने विधानसभा में घोषणा की है कि महिला कर्मचारियों को अब पहले दो बच्चों की तरह ही तीसरे बच्चे के जन्म पर भी पूरे एक वर्ष (365 दिन) का मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) प्रदान किया जाएगा।

घटती प्रजनन दर और महिला कल्याण बना मुख्य आधार

विधानसभा में इस घोषणा के पीछे के प्रमुख कारणों और उद्देश्यों को स्पष्ट किया गया:

  1. कम प्रजनन दर (Low Fertility Rate): राज्य सरकार के अनुसार, तमिलनाडु की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate) घटकर प्रति महिला 1.3 बच्चे रह गई है, जो जनसंख्या स्थिरता के मानक (2.1) से काफी नीचे है।

  2. सशक्तिकरण और मातृत्व सुरक्षा: सरकार का मानना है कि लंबे मातृत्व अवकाश से कामकाजी महिलाओं को करियर और परिवार के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी तथा नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य व पोषण में सुधार होगा।

  3. समान लाभ का विस्तार: पहले से लागू दो बच्चों के लिए 365 दिनों के अवकाश के नियम को अब तीसरे बच्चे तक भी विस्तारित कर दिया गया है।

किन कर्मचारियों को मिलेगा इस नीति का लाभ?

इस नई मातृत्व अवकाश नीति के प्रमुख पात्रता बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • विवाहित महिला सरकारी कर्मचारी: यह विशेष लाभ केवल राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत विवाहित महिला कर्मचारियों पर लागू होगा।

  • विस्तृत सरकारी आदेश (GO): कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जल्द ही इस नीति के क्रियान्वयन, वेतन भुगतान और सेवा शर्तों से संबंधित विस्तृत शासनादेश जारी किया जाएगा।

नीति पर प्रतिक्रियाएं और पितृत्व अवकाश की मांग

सरकार के इस फैसले का जहां व्यापक स्वागत हुआ है, वहीं नीतिगत हलकों में नई बहस भी शुरू हो गई है:

  • परिवारों को बड़ी राहत: महिला कर्मचारी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे कामकाजी माताओं के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बताया है।

  • पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) की मांग: कई सामाजिक विश्लेषकों और कर्मचारी प्रतिनिधियों ने मांग उठाई है कि मातृत्व के साथ-साथ पिताओं के लिए भी पितृत्व अवकाश की अवधि में बढ़ोतरी की जानी चाहिए, ताकि शिशु की देखभाल में साझा जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके।

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