Sanjeev Kumar 88th Birth Anniversary: संजीव कुमार की 88वीं जयंती, एक ऐसा अभिनेता जिसकी वर्सटैलिटी और बेमिसाल अभिनय आज भी है हर कलाकार के लिए मिसाल
हिंदी सिनेमा के सबसे बहुमुखी (Versatile) और दिग्गज अभिनेताओं में शुमार स्वर्गीय संजीव कुमार की 88वीं जयंती पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। 'शोले' के ठाकुर से लेकर 'अंगूर' के कॉमिक अंदाज तक, संजीव कुमार का हर किरदार आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जिंदा है और उनकी विरासत आज भी कलाकारों को प्रेरित कर रही है।
मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी किसी ऐसे अभिनेता का जिक्र होता है जिसने स्टारडम की परवाह किए बिना केवल अपने अभिनय की प्रामाणिकता को तरजीह दी, तो सबसे पहला नाम संजीव कुमार (Sanjeev Kumar) का आता है। आज संजीव कुमार की 88वीं जयंती (88th Birth Anniversary) है। इस खास मौके पर फिल्म इंडस्ट्री, उनके प्रशंसक और सिनेमा प्रेमी एक ऐसे महान कलाकार को याद कर रहे हैं, जिनकी वर्सटैलिटी, सहजता और टाइमलेस परफॉर्मेंस ने हिंदी सिनेमा पर एक अमिट छाप छोड़ी है।
मूल नाम हरिभाई जरीवाला (Haribhai Jariwala) के रूप में जन्मे संजीव कुमार ने पर्दे पर उम्र और रूढ़ियों के बंधनों को तोड़कर जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी फिल्म जगत के लिए एक अनमोल विरासत है।
उम्र को मात देने वाला अभिनय सम्राट
संजीव कुमार की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह किसी भी किरदार में पूरी तरह ढल जाते थे। जब बॉलीवुड में हर मुख्य अभिनेता एक रोमांटिक हीरो या एक्शन स्टार की छवि में बंधना चाहता था, तब संजीव कुमार ने हर उम्र और हर रंग के किरदारों को अपनाया।
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'शोले' के ठाकुर: 30 की उम्र के दशक में उन्होंने फिल्म 'शोले' में एक हाथ कटे, बूढ़े और प्रतिशोधी पूर्व-पुलिस अधिकारी 'ठाकुर बलदेव सिंह' का किरदार इस जीवंतता से निभाया कि वह किरदार हमेशा के लिए अमर हो गया।
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गुलजार के साथ जादुई जुगलबंदी: महान निर्देशक गुलजार के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को 'आंधी', 'मौसम', 'कोशिश' और 'परिचय' जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में दीं। फिल्म 'कोशिश' में एक मूक-बधिर (Deaf and Mute) व्यक्ति के रूप में उनके मूक अभिनय ने दर्शकों और समीक्षकों को रुला दिया था, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Award) भी मिला।
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कॉमेडी के बेताज बादशाह: जहां एक तरफ उन्होंने गंभीर किरदारों से दिल जीता, वहीं 'अंगूर' और 'पति पत्नी और वो' जैसी फिल्मों में उनकी कमाल की कॉमिक टाइमिंग ने यह साबित कर दिया कि मनोरंजन के हर जॉनर पर उनकी बराबर पकड़ थी।
सिर्फ 47 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
बहुमुखी प्रतिभा के धनी इस अभिनेता का जीवन दुखद रूप से काफी छोटा रहा। संजीव कुमार को बचपन से ही दिल की बीमारी थी। उन्होंने कई फिल्मों में बूढ़े व्यक्ति का किरदार निभाया और अक्सर मजाक में कहते थे कि वे कभी बूढ़े नहीं होंगे। दुर्भाग्य से उनकी यह बात सच साबित हुई और 6 नवंबर 1985 को महज 47 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
उन्होंने भले ही वास्तविक जीवन में शादी नहीं की और कम उम्र में दुनिया छोड़ दी, लेकिन फिल्मों के माध्यम से वे जो विरासत छोड़ गए हैं, वह अनंत है। आज उनकी 88वीं जयंती पर, सिनेमा जगत उन्हें एक ऐसे एक्टिंग इंस्टीट्यूशन के रूप में याद करता है, जिसकी चमक वक्त के साथ और गहरी होती जा रही है।
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