AI Usage By Public Representatives: 'जनप्रतिनिधि एआई का अधिक उपयोग करें, योजनाओं की निगरानी होगी बेहतर'; बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बयान
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से विकास योजनाओं की त्वरित निगरानी और पारदर्शिता के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से सरकारी योजनाओं का लाभ सही समय पर और सीधे धरातल तक पहुंचेगा।
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक आने वाले समय में सुशासन और विकास की सबसे बड़ी आवश्यकता बनने जा रही है। यदि इन तकनीकों का समय पर उपयोग नहीं किया गया तो विकास की दौड़ में पीछे छूटने का खतरा रहेगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से AI आधारित तकनीकों का अधिकतम उपयोग कर योजनाओं की निगरानी और जनता से संवाद को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री बिहार विधान सभा के विस्तारित भवन में आयोजित बिहार विधानमंडल के सदस्यों के लिए 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संवेदीकरण एवं मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के कार्यान्वयन' विषय पर आयोजित प्रबोधन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत विकसित 'परियोजना निगरानी प्रणाली (Project Monitoring System)' वेब पोर्टल का रिमोट के माध्यम से शुभारंभ भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो दशक पहले तक कंप्यूटर का उपयोग सीमित था, लेकिन आज AI और डिजिटल तकनीक शासन, प्रशासन और विकास के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि मंत्री, विधायक और विधान पार्षद इन तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग करें, ताकि विकास योजनाओं की निगरानी बेहतर तरीके से हो सके और आम लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि विकास योजनाओं के एस्टीमेट तैयार करने में भी AI की उपयोगिता सामने आई है। भवन निर्माण विभाग के एक एस्टीमेट की AI के माध्यम से जांच करने पर पांच से सात प्रतिशत तक लागत में कमी आई, जिससे बचाई गई राशि को अन्य विकास कार्यों में लगाया जा सकता है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार सहयोग कार्यक्रम के संचालन तथा एक करोड़ पात्र लोगों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी AI का उपयोग कर रही है। इसके अलावा राज्य में किसानों का डिजिटल सर्वे कराया जा रहा है और 60 लाख किसानों को डिजिटल आईडी से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग कर विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है, लेकिन डिजिटल युग की आवश्यकताओं को देखते हुए इसे और सशक्त बनाने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि मुजफ्फरपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है, जिससे राज्य में तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रियों, विधायकों, विधान पार्षदों के साथ-साथ उनके सहयोगियों को भी समय-समय पर AI, कंप्यूटर और सोशल मीडिया के उपयोग का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि वे नई तकनीकों से लगातार अपडेट रहें और जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करा सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के सभी पंचायतों में मौसम केंद्र संचालित हैं और मौसम का पूर्वानुमान 70 से 80 प्रतिशत तक सटीक साबित हो रहा है, जो कृषि और ग्रामीण विकास के लिए उपयोगी है। कार्यक्रम में बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव, राज्य सरकार के मंत्री, विधायक, विधान पार्षद के अलावा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और बिहार विधानमंडल के कर्मी उपस्थित रहे।
इनपुट :आईएएनएस
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