पीएम मोदी ने विमोचित की पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'Triumph of the Indian Republic', कहा- यह भारतीय लोकतंत्र की धरोहर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में भारत के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स' (Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles) का विमोचन किया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति के संघर्षमय जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान की सराहना की और युवाओं को शॉर्टकट संस्कृति से बचने की सलाह दी।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने बुधवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा 'ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स' (Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles) का विमोचन किया।
इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में
"यह भारतीय लोकतंत्र की अमूल्य धरोहर"
पुस्तक विमोचन के बाद सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस आयोजन को एक 'पारिवारिक कार्यक्रम' करार दिया और पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपने दीर्घकालिक संबंधों को याद किया:
"कोविंद जी की जीवन यात्रा, समाज और देश के लिए उनका योगदान अतुलनीय है। मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि उनकी यह आत्मकथा भारत के लोकतंत्र और समाज के लिए एक अमूल्य धरोहर बनेगी।" — नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
पीएम मोदी ने पुस्तक के शीर्षक की सराहना करते हुए कहा कि रामनाथ कोविंद के जीवन के संघर्ष व्यक्तिगत थे, लेकिन उन संघर्षों का सुखद परिणाम भारत के लोकतंत्र और गणराज्य की जीत के रूप में सामने आया।
युवाओं को 'शॉर्टकट' से दूर रहने की सलाह
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं से जीवन में शॉर्टकट तलाशने के बजाय सफल और प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की आत्मकथाएं पढ़ने और उनसे सीख लेने का आह्वान किया:
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प्रेरणादायक सफर: उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात स्थित परौंख गांव के एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने का रामनाथ कोविंद का सफर हर नागरिक के लिए प्रेरणादायी है।
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संवैधानिक मूल्यों की रक्षा: पुस्तक में उनके वकालत के दिनों, राज्यसभा सांसद, बिहार के राज्यपाल और फिर 14वें राष्ट्रपति के रूप में देश सेवा के दौरान उनके अनुभवों और संवैधानिक मूल्यों को रेखांकित किया गया है।
जमीनी स्तर से सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की यह आत्मकथा उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों, सामाजिक सेवा और भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के कई अनकहे अध्यायों को पाठकों के सामने लाती है।
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