Government Multilingual AI Platform: अब अपनी भाषा में मिलेंगी सरकारी सेवाएं; केंद्र सरकार लाएगी 'मल्टीलिंगुअल एआई' मॉडल, भाषाई बाधाएं होंगी खत्म

केंद्र सरकार देश के नागरिकों तक डिजिटल और सरकारी सेवाओं की आसान पहुंच बनाने के लिए एक नया 'मल्टीलिंगुअल एआई' (Multilingual AI) मॉडल पेश करने जा रही है। इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित व्यवस्था से नागरिक हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली और मराठी सहित अपनी मातृभाषा में सरकारी योजनाओं की जानकारी ले सकेंगे और सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे डिजिटल विभाजन (Digital Divide) को समाप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी।

Aug 13, 2026 - 11:35
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Government Multilingual AI Platform: अब अपनी भाषा में मिलेंगी सरकारी सेवाएं; केंद्र सरकार लाएगी 'मल्टीलिंगुअल एआई' मॉडल, भाषाई बाधाएं होंगी खत्म

नई दिल्ली। केंद्र सरकार Multilingual और वॉयस-फर्स्ट AI तकनीक पर काम कर रही है ताकि शासन और सार्वजनिक सेवाएं ज्यादा समावेशी और आसान बन सकें।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, इस लक्ष्य के लिए डिजिटल इंडिया 'भाषिणी' डिवीजन डीआईबीडी और नीति आयोग ने भाषिणी फॉर सेवा/संचालन पहल के तहत एक घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का मकसद 'भाषिणी' के Multilingual AI इकोसिस्टम का इस्तेमाल करके शासन को ज्यादा समावेशी और सुलभ बनाना है। इसके लिए नीति आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं में AI आधारित भाषा तकनीकों को जोड़ा जाएगा।

सरकारी बयान में कहा गया, "यह साझेदारी नागरिकों को उनकी पसंदीदा भारतीय भाषाओं में सरकारी जानकारी और सेवाओं तक पहुंच दिलाएगी। इससे सरकार और नागरिकों के बीच संवाद मजबूत होगा और सार्वजनिक सेवा वितरण में बहुभाषी संचालन को बढ़ावा मिलेगा।"

इस साझेदारी के तहत 'भाषिणी' के भाषा अनुवाद एपीआई और रेफरेंस एप्लीकेशन के जरिए नीति आयोग की सेवाओं तक बहुभाषी पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही अनुवाद मॉडल के विकास और लगातार सुधार में मदद मिलेगी। भाषा तकनीकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम और संचार वर्कफ्लो में भी जोड़ा जाएगा।

इस इको सिस्टम का एक अहम हिस्सा 'स्मृति' है। इसका पूरा नाम सिस्टम फॉर मीटिंग रिकॉर्डिंग, इनफॉर्मेशन एंड ट्रांसक्रिप्शन इंटरफेस है। इसे 'भाषिणी' के साथ मिलकर विकसित किया गया है। 'स्मृति' बैठक के मिनट्स को अपने आप तैयार करेगा और उनका बहुभाषी अनुवाद भी करेगा। इससे सरकारी कामकाज की दक्षता बढ़ेगी और अंतिम व्यक्ति तक शासन ज्यादा समावेशी बनेगा।

यह सहयोग नीति आयोग के 'नीति तारा' यानी टूलकिट फॉर एनालिसिस, रिव्यू एंड एक्शन पर भी आधारित है। 'नीति तारा' डेटा को जमीनी स्तर पर कार्रवाई में बदल रहा है।

अब तक देशभर में 200 से ज्यादा क्षमता निर्माण सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। इनके जरिए जिलों और ब्लॉकों के 4,000 से अधिक अधिकारियों को डेटा आधारित अंतर्दृष्टि के लिए प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे साक्ष्य आधारित फैसले ले सकें।

साझेदारी के तहत नीति आयोग के विभिन्न क्षेत्रों के लिए रेफरेंस एप्लीकेशन और वॉयस बॉट भी विकसित किए जाएंगे। साथ ही विशेष शब्दावली और क्षेत्र विशेष की जरूरतों के लिए भाषा तकनीक को मजबूत किया जाएगा।

'भाषिणी सहयोगी' के माध्यम से 'भाषादान' का इस्तेमाल करके भाषाई डेटा का संग्रह, क्यूरेशन और प्रसार किया जाएगा। इसके लिए नीति आयोग के अधिकारियों और आम नागरिकों से टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो सैंपल देने का आग्रह किया जाएगा।

इनपुट : आईएएनएस

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