OTT Direct Release Censorship: ओटीटी पर सीधे रिलीज होने वाली फिल्मों पर लगेगा सेंसर? सख्त नियम लाने की तैयारी में भारत सरकार
भारत सरकार डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (OTT Platforms) पर परोसी जा रही अश्लीलता और संवेदनशील सामग्री को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। हाल ही में हुए विवादों के बाद, सरकार सीधे ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज के लिए सख्त सेंसरशिप नियमों (Draft IT Rules 2026) पर गंभीरता से विचार कर रही है।
नई दिल्ली: थिएटरों में रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए तो 'केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड' (CBFC) यानी सेंसर बोर्ड मौजूद है, लेकिन ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स पर सीधे रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज के लिए अब तक कोई केंद्रीय सेंसरशिप व्यवस्था नहीं थी। हालांकि, अब यह परिदृश्य बदलने वाला है। भारत सरकार सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर स्ट्रीम होने वाली फिल्मों (Direct-to-OTT Releases) पर नकेल कसने और उन्हें औपचारिक सेंसरशिप या सख्त नियमों के दायरे में लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
हाल ही में दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म 'सतलुज' (Satluj) को ZEE5 प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के महज 48 घंटे के भीतर केंद्र सरकार द्वारा "सुरक्षा चिंताओं" और आईटी नियमों का हवाला देकर हटाए जाने के बाद इस मुद्दे ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है।
क्यों पड़ी सख्त नियमों की जरूरत?
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों को अनिवार्य रूप से CBFC सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। इसके विपरीत, जो फिल्में या सीरीज सीधे ओटीटी पर आती हैं, वे केवल आईटी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत 'स्व-वर्गीकरण' (Self-Classification जैसे U, U/A 13+, A रेटिंग) और शिकायत निवारण तंत्र के तहत संचालित होती हैं।
सरकार का मानना है कि इस छूट का फायदा उठाकर कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अत्यधिक अश्लीलता, अभद्र भाषा, और धार्मिक या जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कंटेंट परोसा जा रहा है। इसके अलावा, कानूनी दांवपेंचों का फायदा उठाकर कई ऐसी फिल्में बिना किसी कट के ओटीटी पर डायरेक्ट रिलीज कर दी जाती हैं, जिन्हें सेंसर बोर्ड ने थिएटरों के लिए पास नहीं किया था।
'ड्राफ्ट आईटी (डिजिटल कोड) रूल्स 2026' की तैयारी
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, सरकार 'ड्राफ्ट आईटी (डिजिटल कोड) रूल्स, 2026' तैयार कर रही है। इन प्रस्तावित नियमों के तहत कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
-
1994 के केबल टीवी प्रोग्राम कोड का प्रभाव: नए नियमों में 1994 के सख्त केबल टीवी कोड की तरह ही डिजिटल कंटेंट के लिए भी "लक्ष्मण रेखा" तय की जा सकती है।
-
कंटेंट पर कड़ी पाबंदियां: भाषा, विषय, धर्म, जाति, और महिलाओं व बच्चों से जुड़े संवेदनशील चित्रणों पर बेहद सख्त गाइडलाइंस लागू होंगी।
-
इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का दखल: एक सरकारी अंतर-विभागीय समिति को यह अधिकार दिया जा सकता है कि वह किसी भी आपत्तिजनक या नियमों का उल्लंघन करने वाले डिजिटल कंटेंट को सीधे ब्लॉक करने, डिलीट करने या उसमें बदलाव (Censor) करने का आदेश दे सके।
-
टैकडाउन समय सीमा में कमी: सरकार ने हाल ही में नियमों में बदलाव कर अवैध कंटेंट को हटाने की समय सीमा को 36 घंटे से घटाकर महज 3 घंटे कर दिया है।
मेकर्स और प्लेटफॉर्म्स जता रहे हैं चिंता
सरकार जहां इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर "उचित प्रतिबंध" (Reasonable Restrictions) और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, डायरेक्टर्स और फिल्म समीक्षक इस पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
रचनाकारों (Creators) का तर्क है कि ऑन-डिमांड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारण-युग (Broadcast-era) के पुराने और सख्त नियम लागू करने से रचनात्मक स्वतंत्रता पूरी तरह खत्म हो जाएगी और यह एक प्रकार की 'प्रशासनिक सेंसरशिप' को जन्म देगा। फिलहाल सरकार इस मसले पर विभिन्न हितधारकों (Stakeholders) और कानूनी विशेषज्ञों से राय-मशविरा कर रही है, और जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की जा सकती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)