पीएम मोदी के दौरे से पहले आईआईटी दिल्ली में सुरक्षा और मंत्रोच्चार पर विवाद; असदुद्दीन ओवैसी समेत विपक्ष ने उठाए सवाल
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने से पहले सुरक्षा और सांस्कृतिक प्रोटोकॉल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मेटल डिटेक्टर्स, सख्त चेकिंग और परिसर में प्रतिबंधों के साथ-साथ पदक वितरण के दौरान सिर झुकाने और तैत्तिरीयोपनिषद के 'शिक्षावल्ली' खंड से वैदिक मंत्रोच्चार के दौरान खड़े होने के निर्देशों पर असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस की डॉ. शमा मोहम्मद जैसी हस्तियों ने सवाल उठाए। हालांकि, समर्थकों ने इसे भारतीय शिक्षा परंपरा और विरासत का हिस्सा बताया।
नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT Delhi) के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के मुख्य अतिथि के रूप में आगमन से पहले परिसर का माहौल सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक निर्देशों को लेकर चर्चाओं में आ गया।
समारोह की तैयारियों के तहत लागू किए गए सख्त सुरक्षा प्रतिबंधों के अलावा पदक लेते समय 'सिर झुकाने' (Head Bowing Protocol) तथा तैत्तिरीयोपनिषद (Taittiriya Upanishad) के 'शिक्षावल्ली' (Shikshavalli) खंड से लिए गए वैदिक मंत्रों के उच्चारण के दौरान खड़े रहने के निर्देशों पर बहस छिड़ गई।
सख्त सुरक्षा जांच और प्रशासनिक निर्देश
प्रधानमंत्री के दौरे को ध्यान में रखते हुए परिसर में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी:
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परिसर में प्रतिबंध: जगह-जगह मेटल डिटेक्टर्स लगाए गए और छात्रों तथा अभिभावकों के लिए कड़े चेकिंग नियम लागू किए गए, जिससे सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई।
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समारोह के नियम: छात्रों को पदक प्राप्त करते समय मंच पर विशिष्ट शारीरिक मुद्रा (सिर झुकाकर सम्मान प्रकट करना) अपनाने और उपनिषद के श्लोकों के पाठ के समय सम्मान में खड़े रहने के निर्देश दिए गए थे।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: "शैक्षणिक संस्थानों की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल"
विपक्षी नेताओं ने इन निर्देशों और धार्मिक/वैदिक तत्वों के प्रयोग पर तीखी आपत्ति जताई:
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असदुद्दीन ओवैसी का रुख: एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया कि एक प्रमुख राष्ट्रीय तकनीकी और धर्मनिरपेक्ष संस्थान में विशिष्ट धार्मिक परंपराओं के अनुष्ठानों को अनिवार्य या औपचारिक हिस्सा क्यों बनाया जा रहा है।
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डॉ. शमा मोहम्मद का बयान: कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला बनाए रखना चाहिए।
परंपरा और विरासत के पक्ष में तर्क
विवाद के बीच कई विद्वानों, पूर्व छात्रों और समर्थकों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि तैत्तिरीयोपनिषद का 'शिक्षावल्ली' खंड मूल रूप से प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली का दीक्षांत उपदेश है, जिसमें छात्रों को सत्य बोलने, स्वाध्याय करने और नैतिक आचरण बनाए रखने की सीख दी जाती है।
समर्थकों ने तर्क दिया कि यदि औपनिवेशिक काल की काली गाउन और हैट की यूरोपीय परंपरा को स्वीकार किया जा सकता है, तो भारत की अपनी समृद्ध प्राचीन ज्ञान परंपरा और शैक्षणिक धरोहर के श्लोकों का सम्मान करने में कोई बुराई नहीं है।
शांतिपूर्ण समापन
तमाम बहसों और राजनीतिक बयानों के बावजूद दीक्षांत समारोह अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित हुआ, जिसमें हजारों स्नातकों को उनकी डिग्रियां सौंपी गईं और पीएम मोदी ने छात्रों को नवाचार व राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया।
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