News Update: 108 रुपए के लिए 37 साल तक लड़ा केस, कोर्ट से राहत नहीं
- कंडक्टर पर बिना टिकट यात्रा कराने का था आरोप.
चंडीगढ़: सरकारी खजाने को हुए 108 रुपए के नुकसान का विवाद कितना लंबा खिंच सकता है, इसका उदाहरण हरियाणा रोडवेज के एक कंडक्टर का मामला है। यह कानूनी लड़ाई 37 साल तक चली और अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले के साथ इसका पटाक्षेप हुआ है। कोर्ट ने कंडक्टर को राहत देने से इनकार करते हुए विभाग द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वैध माना है।
वर्ष 1989 में जींद डिपो के तत्कालीन कंडक्टर राम कुमार पर विभाग ने आरोप लगाया था कि उन्होंने बस में बिना टिकट यात्रा कराई। इससे सरकार को 108 रुपए का राजस्व नुकसान हुआ।
कोर्ट ने खारिज की याचिका-
जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने अंतिम फैसला सुनाते हुए कंडक्टर की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड से साबित होता है कि जांच रिपोर्ट और कारण बताओ नोटिस कर्मचारी को दिए गए थे। उन्होंने इसका जवाब भी दिया था. इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ। कोर्ट ने गौर किया कि कंडक्टर राम कुमार ने यह स्वीकार किया था कि बस में 70 यात्री सवार थे, जो निर्धारित क्षमता से 18 अधिक थे। हाई कोर्ट ने जिला न्यायाधीश, जींद के फैसले को बरकरार रखा और माना कि विभाग द्वारा की गई कार्रवाई सही थी।
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