Relief For Abhishek Banerjee: टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने संडे की स्पेशल सुनवाई में दफ्तर पर बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने रविवार को एक विशेष सुनवाई (Special Sunday Sitting) आयोजित करते हुए दक्षिण 24 परगना के आमताला स्थित उनके निर्वाचन क्षेत्र के दफ्तर (MP Office) पर चल रही तोड़फोड़ की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रशासन को जुलाई के अंत तक यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया है।

Jul 19, 2026 - 17:02
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Relief For Abhishek Banerjee: टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने संडे की स्पेशल सुनवाई में दफ्तर पर बुलडोजर कार्रवाई पर लगाई रोक

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया था जब दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दिग्गज नेता और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के आमताला स्थित दफ्तर पर बुलडोजर की कार्रवाई (Demolition Drive) शुरू कर दी थी। हालांकि, रविवार को इस मामले में एक बेहद नाटकीय मोड़ आया। कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने रविवार दोपहर एक आपातकालीन विशेष सुनवाई (Special Sunday Sitting) बुलाई और इस तोड़फोड़ की कार्रवाई पर तत्काल अंतरिम रोक लगा दी है।

न्यायालय ने राज्य प्रशासन को जुलाई 2026 के अंत तक इस विवादित संपत्ति पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

'संडे स्पेशल बेंच' में हुई तीखी बहस (Urgent Sunday Hearing)

यह दफ्तर जिस जमीन और इमारत पर बना है, उसका स्वामित्व 'लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड' (Leaps and Bounds Private Limited) नामक कंपनी के पास है, जो अभिषेक बनर्जी से जुड़ी हुई बताई जाती है। जिला प्रशासन द्वारा शनिवार को की गई कार्रवाई के खिलाफ कंपनी और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने रविवार सुबह एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष एक आपातकालीन रिट याचिका दायर की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस राजा बसु चौधरी (Justice Raja Basu Chowdhury) की एकल पीठ ने रविवार दोपहर को ही विशेष सुनवाई शुरू कर दी।

कोर्ट ने कहा- "जल्दबाजी में की गई कार्रवाई, पक्ष रखने का नहीं मिला मौका" (Due Process Violated)

सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी और कंपनी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता (Advocate General) किशोर दत्त ने दलील दी कि प्रशासन ने बिना उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए यह मनमानी तोड़फोड़ शुरू की है। उन्होंने कोर्ट को बताया:

"प्रशासन ने भवन के वास्तविक मालिक को नोटिस भेजने के बजाय एक कॉर्पोरेट इकाई के निदेशक को नोटिस थमा दिया। 30 जून को नोटिस दिया गया और 15 जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की गई, लेकिन 18 जुलाई को बिना किसी पूर्व सूचना या अंतिम आदेश की कॉपी दिए शनिवार के दिन अचानक बुलडोजर भेज दिया गया। याचिकाकर्ता को शिकायत की कॉपी या सुनवाई अधिकारी की सिफारिश देखने का मौका तक नहीं मिला। यह पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।"

दूसरी तरफ, राज्य सरकार की ओर से वर्तमान महाधिवक्ता सुरजीत नाथ मित्रा ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि यह निर्माण जिला परिषद के 2004 के नियमों के तहत बिना किसी स्वीकृत बिल्डिंग प्लान (Unsanctioned Plan) के अवैध रूप से किया गया था, इसलिए प्रशासन की कार्रवाई नियमों के तहत सही है।

जुलाई के अंत तक अब नहीं चलेगा बुलडोजर (Interim Stay Till July End)

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस राजा बसु चौधरी ने प्रथम दृष्टया (Prima Facie) माना कि भवन के मालिकों को अपना पक्ष रखने या प्रशासनिक आदेश का जवाब देने का पर्याप्त और उचित अवसर नहीं दिया गया था।

अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जब तक इस मामले की सुनवाई नियमित बेंच (Regular Bench) के सामने नहीं हो जाती, तब तक संपत्ति के स्वरूप, चरित्र और कब्जे के संबंध में यथास्थिति (Status Quo) कायम रखी जाए कोर्ट ने राज्य सरकार को इस निर्माण और कार्रवाई से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज अगली सुनवाई में नियमित बेंच के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है।

हाईकोर्ट के इस आदेश से जहां तृणमूल कांग्रेस और अभिषेक बनर्जी के समर्थकों ने राहत की सांस ली है, वहीं राज्य की विपक्षी पार्टियों ने निर्माण की वैधता को लेकर राजनीतिक हमले और तेज कर दिए हैं।

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