बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; पुणे की गुरुनानक डेयरी का लाइसेंस अनुचित रूप से निलंबित रखने पर FDA पर लगाया ₹5 लाख का हर्जाना, तत्काल दुकान खोलने के आदेश

Aug 18, 2026 - 15:07
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बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; पुणे की गुरुनानक डेयरी का लाइसेंस अनुचित रूप से निलंबित रखने पर FDA पर लगाया ₹5 लाख का हर्जाना, तत्काल दुकान खोलने के आदेश
Bombay High Court Slams FDA: Orders ₹5 Lakh Compensation To Pune Dairy

मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने एक ऐतिहासिक फैसले में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Maharashtra FDA) की कार्यप्रणाली और मनमानी पर कड़ा प्रहार किया है। अदालत ने पुणे की प्रसिद्ध 'गुरुनानक डेयरी एंड स्वीट्स' (Gurunanak Dairy and Sweets) के लाइसेंस के लंबे निलंबन को रद्द करते हुए एफडीए को आदेश दिया है कि वह डेयरी मालिक को 30 दिनों के भीतर ₹5 लाख का मुआवजा (Compensation) अदा करे।

इसके साथ ही हाई कोर्ट की खंडपीठ ने डेयरी को तत्काल प्रभाव से अपना व्यावसायिक संचालन फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है।

पुनः निरीक्षण में 36 में से 35 अंक, फिर भी बंद रखी दुकान

यह मामला तब शुरू हुआ जब फूड पॉइजनिंग की एक शुरुआती शिकायत के बाद एफडीए ने डेयरी का लाइसेंस निलंबित कर दिया था:

  1. कमियों का त्वरित समाधान: नोटिस मिलने के बाद डेयरी संचालक ने स्वच्छता और संचालन से जुड़ी सभी आवश्यक कमियों को तुरंत दुरुस्त किया और दोबारा निरीक्षण की मांग की।

  2. शानदार प्रदर्शन: 13 जुलाई को हुए आधिकारिक पुनः निरीक्षण (Re-inspection) में एफडीए निरीक्षकों ने डेयरी के स्वच्छता मानकों और नियमों के पालन को 36 में से 35 अंक दिए।

  3. 8.5 लाख रुपये का राजस्व नुकसान: लगभग पूर्ण अनुपालन रिपोर्ट के बावजूद अधिकारियों ने निलंबन हटाने में अकारण हफ्तों की देरी की, जिसके चलते दुकान बंद रही और मालिक को करीब ₹8.5 लाख का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

"खाद्य सुरक्षा जरूरी, लेकिन यह सरासर मनमानापन है" — अदालत

न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान एफडीए की लापरवाही और अति-उत्साह पर कड़ी फटकार लगाई:

  • 'प्लेन एंड सिंपल परवर्सिटी': अदालत ने अधिकारियों द्वारा निर्णय लेने में की गई अनावश्यक देरी को 'पूरी तरह से विकृत और मनमाना रवैया' (Plain and simple perversity) करार दिया।

  • अधिकारियों की ज्यादती: पीठ ने कहा कि यद्यपि राज्यव्यापी स्वच्छता अभियान और खाद्य सुरक्षा के उच्च मानक बनाए रखना प्रशंसनीय है, लेकिन जब किसी कारोबारी ने सभी नियमों का शत-प्रतिशत पालन कर लिया हो, तब भी उसकी दुकान बंद रखना अधिकारियों की अनावश्यक ज्यादती (Overboard) है।

  • कारोबारी अधिकारों का संरक्षण: अदालत ने रेखांकित किया कि खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन का उद्देश्य व्यापारियों को सुधार का अवसर देना है, न कि वैध तरीके से चलने वाले कारोबारों को बर्बाद करना।

30 दिनों के भीतर भुगतान का आदेश

अदालत ने पीड़ित पक्ष को हुई आर्थिक क्षति और मानसिक परेशानी को देखते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए:

  • मुआवजा राशि: महाराष्ट्र एफडीए को 30 दिनों की समय-सीमा के भीतर पीड़ित डेयरी मालिक को ₹5 लाख की राशि का भुगतान करना होगा।

  • तत्काल बहाली: डेयरी को बिना किसी अतिरिक्त प्रशासनिक बाधा के अपने सभी उत्पादों की बिक्री और निर्माण कार्य तुरंत शुरू करने की अनुमति दी गई है।

व्यापारियों और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच संतुलन की नजीर

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला सरकारी एजेंसियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि नियमों और छापों की आड़ में छोटे व्यापारियों और उद्यमियों का उत्पीड़न नहीं किया जा सकता।

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