Bihar Police Bust Fake IAS Officer: बिहार के खगड़िया में पकड़ा गया फर्जी आईएएस मनीष गुप्ता; टेस्ला समेत लक्जरी गाड़ियां, विदेशी शराब और 100 करोड़ की संपत्ति का भंडाफोड़
बिहार के खगड़िया जिले में पुलिस ने खुद को आईएएस (IAS) अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने वाले आरोपी मनीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस छापेमारी में आरोपी के जमालपुर बाजार स्थित आवास से 'भारत सरकार' लिखी टेस्ला समेत दो लक्जरी गाड़ियां, 31 लीटर विदेशी शराब, आईफोन, फर्जी आईडी कार्ड और संरक्षित प्रजाति के बारहसिंगा के सींग बरामद किए गए हैं। आरोपी की अनुमानित संपत्ति ₹100 करोड़ के आसपास बताई जा रही है।
खगड़िया (बिहार): बिहार पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी बताने वाले जालसाज मनीष कुमार गुप्ता (Manish Kumar Gupta) को खगड़िया जिले से गिरफ्तार किया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी जमालपुर बाजार स्थित अपने परिसर से प्रशासनिक रसूख दिखाकर लोगों के साथ बड़े पैमाने पर ठगी कर रहा था।
छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपी के पास से करीब ₹100 करोड़ मूल्य की संदिग्ध संपत्ति, महंगी गाड़ियां, प्रतिबंधित वस्तुएं और अवैध शराब बरामद हुई है।
'भारत सरकार' लिखी टेस्ला कार और लक्जरी सामान बरामद
पुलिस जब जमालपुर बाजार स्थित आरोपी के ठिकाने पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। छापेमारी में निम्नलिखित चीजें बरामद की गईं:
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लक्जरी गाड़ियां: आरोपी के पास से 'Government of India' (भारत सरकार) लिखी दो महंगी गाड़ियां जब्त की गईं, जिनमें एक टेस्ला (Tesla) कार भी शामिल है।
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प्रतिबंधित वन्यजीव अवशेष: आरोपी के घर से वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति के बारहसिंगा के सींग (Barasingha Antlers) मिले।
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अवैध शराब और गैजेट्स: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद आरोपी के पास से 31 लीटर विदेशी शराब, कई आईफोन (iPhones), वकीलों व अधिकारियों के फर्जी पहचान पत्र और स्टांप बरामद किए गए।
ट्रांसफर-पोस्टिंग और काम कराने के नाम पर करोड़ों की ठगी
प्राथमिक जांच के अनुसार, मनीष कुमार गुप्ता पिछले कई सालों से खगड़िया और आसपास के जिलों में खुद को केंद्रीय मंत्रालय में तैनात वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बताता था:
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प्रशासनिक पैरवी का झांसा: वह आम लोगों और ठेकेदारों को प्रशासनिक काम कराने, जमीन के विवाद सुलझाने और सरकारी विभागों में पैरवी का झांसा देकर मोटी रिश्वत लेता था।
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रसूख दिखाने के लिए स्टाफ: आरोपी ने अपना दबदबा बनाए रखने के लिए निजी बाउंसर और कर्मचारी तैनात कर रखे थे, जिन्हें वह भारी वेतन देता था ताकि लोगों को उसके असली अधिकारी होने पर कोई संदेह न हो।
कैसे हुआ भंडाफोड़?
मामले का खुलासा आरोपी के ही एक परिचित/सहयोगी की शिकायत और पुलिस की गुप्त सूचना के बाद हुआ। पैसों के लेनदेन में आपसी मतभेद के बाद पुलिस को आरोपी की गतिविधियों की सटीक जानकारी मिली।
बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (Economic Offences Unit - EOU) अब मनीष गुप्ता की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और उसके संपर्क में रहे लोगों की जांच कर रही है। सोशल मीडिया पर भी इस फर्जी आईएएस अफसर के आलीशान रहन-सहन और बरामद गाड़ियों के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
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