महुआ मोइत्रा ने की बंगाल सीएम शुभेंदु की तारीफ
नई दिल्ली: मुहआ ने कहा, "मैं जब पहले करीमपुर से चुनाव लड़ी, कोई मेरे साथ नहीं आ रहा था, तब मेरी पहली रैली में शुभेंदु आए. जब एक बार 2014 में मुझे कहीं लोकसभा से टिकट मिलने वाला था, लेकिन नहीं मिला. मैं सारी पूरी रात रोई. शुभेंदु ने मुझे बोला कि न बहन- हम हैं तेरे साथ. तो ये इमोशनल कनेक्शन रहते हैं."
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी की हार, नेताओं की बगावत, ममता की नेतृत्व क्षमता और अभिषेक बनर्जी के बारे में खुलकर बात की है. कृष्णानगर की लोकसभा सांसद और तेज-तर्रार नेत्री महुआ मोइत्रा ने इशारों-इशारों में TMC सुप्रीमों के नेतृत्व पर सवालिया निशान उठाते हुए कहा है कि ममता बनर्जी सबके साथ निजी संबंध बनाकर रखती हैं. ममता बनर्जी और हमारी पार्टी की यही कमी रही है कि हम सबको एडजस्ट करते हैं. लोकसभा चुनाव के नतीजों के बारे में उन्होंने कहा कि तीन चार बार के सांसद को हम बदल सकते हैं लेकिन नहीं किया.
एक मीडिया संस्थान के साथ एक लंबी बातचीत में महुआ मोइत्रा ने कहा कि चुनाव के समय पार्टी नेतृत्व को नेताओं का हर बार रिव्यू करना चाहिए था कि इनमें कितना दम है और ये पार्टी और सिंबल के बिना जीत के आ सकते हैं कि नहीं. लेकिन होता क्या है कि जब तक वह चल सकता है तो उसे एक बार चुनाव लड़ा लेते हैं क्योंकि ममता दीदी नहीं चाहतीं थी कि पुराने व्यक्ति को हटा दो.
महुआ मोइत्रा ने कहा कि अगर हम लोग इस प्रक्रिया को निर्मम और निष्पक्ष तरीके से ये कर सकते थे तो आज यह हालत नहीं होती क्योंकि इन लोगों ने इसे हल्के में ले लिया.
महुआ मोइत्रा ने इस इंटरव्यू में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के उन दिनों की खूब तारीफ की जब वे टीएमसी में थे. महुआ ने कहा कि उनके आज भी शुभेंदु के साथ मेरे पर्सनल संबंध अच्छे हैं. महुआ ने कहा, "शुभेंदु मेरे बहुत अच्छे दोस्त थे और हम जब एक साथ पार्टी में थे, उन्होंने मुझे बहुत सपोर्ट किया."
मुहआ ने कहा, "मैं जब पहले करीमपुर से चुनाव लड़ी, कोई मेरे साथ नहीं आ रहा था, तब मेरी पहली रैली में शुभेंदु आए. जब एक बार 2014 में मुझे कहीं लोकसभा से टिकट मिलने वाला था, लेकिन नहीं मिला. मैं सारी पूरी रात रोई. शुभेंदु ने मुझे बोला कि न बहन- हम हैं तेरे साथ. तो ये इमोशनल कनेक्शन रहते हैं."
उन्होंने कहा कि ये अलग बात है कि शुभेंदु बीजेपी में चले गए और अब बात नहीं होती है लेकिन इमोशनल या निजी संबंध तो कोई भूल नहीं सकता.
फिरहाद हकीम, यूसुफ पठान से नाराजगी: TMC में हुई बगावत के बाद TMC सांसद यूसुफ पठान अब ममता गुट से अलग हो गए हैं. ममता के विश्वस्त रहे फिरहाद हकीम भी ऋतब्रत गुट में हैं. इन बगावतों पर भी महुआ ने लंबी चर्चा की.
यूसुफ पठान को टिकट देने पर महुआ ने पार्टी नेतृत्व पर साफ सवाल खड़ा किया और बीबीसी को बोलीं, "देखिए पार्टी के उम्मीदवार हम तय नहीं करते. वह नेतृत्व ने तय किया होगा और हर सिद्धांत सही, गलत तो निकल ही सकता है. ये गलत निकल गया है. हमने यूसुफ़ पठान को गुजरात से लाकर मुर्शिदाबाद से चुनाव जितवाया और एमपी बनवाया. वह तो कमेंटेटर ही थे. तो अगर वह दो साल में ही गद्दारी करें, तो हम क्या बोल सकते हैं, वही बोल सकते हैं."
फिरहाद हकीम पर महुआ ने कहा कि उनको पूछिए. एक गद्दार क्यों गद्दारी करता है, इसकी वजह सिर्फ़ गद्दार बता सकता है. आप दो ब्रैकेट में सबको रख सकते हैं, एक लालच के लिए और एक भय के लिए. तो वह किस ब्रैकेट में हैं, यह वही बता सकते हैं?
सयानी के फैसले पर हैरानी: महुआ ने सयानी घोष के फैसले पर कहा कि वे सचमुच में मानती थी कि वह युवा ऊर्जा हैं और मुझे लगता था कि वह विपक्ष की राजनीति के लिए अच्छी हैं. उन्हें पार्टी ने ने इतने कम समय में इतना कुछ दिया है- एमएलए बनाया, नेशनल यूथ प्रेसीडेंट बनाया और ममता बनर्जी की अपनी सीट जादवपुर दी. इसीलिए मुझे आश्चर्य हुआ.
महुआ मोइत्रा ने कहा कि वे अपने राजनीतिक जीवन में बीजेपी के खिलाफ लड़ती रहेंगी.
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