अब केवल डॉक्टर की पर्ची पर ही मिलेंगी खांसी की दवाएं
- दवा की गुणवत्ता व मरीजों की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने नियमों में किया बदलाव.
एजेंसी, नई दिल्ली। हाल की कुछ घटनाओं से सबक लेते हुए दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मद्देनजर सरकार ने देशभर में कफ सिरप (खांसी की दवा) समेत सिरप आधारित दवाओं की बिक्री को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। अब डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ सिरप बाजार में नहीं बिकेंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में संशोधन कर ऐसे सिरपों की बिक्री और वितरण को डॉक्टर के पर्चे और लाइसेंस प्राप्त फार्मेसी के दायरे में लाने का फैसला किया है। मंत्रालय ने बताया कि पहले ड्रग्स रूल्स की अनुसूची-के के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में कफ सिरप की बिक्री के लिए कुछ खुदरा लाइसेंस संबंधी प्रावधानों से छूट दी गई थी। लेकिन अब संबंधित प्रविष्टि से सिरप शब्द हटा दिया गया है, जिससे यह छूट समाप्त हो गई है।
नियमों में बदलाव के बाद छोटे गांवों में भी कफ सिरप केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त दवा दुकानों के माध्यम से ही बेचे और वितरित किए जा सकेंगे। यह व्यवस्था ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार लागू होगी। यह संशोधन ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के तहत आधिकारिक गजट में अधिसूचित किया गया है। यह कदम सिरप आधारित दवाओं पर नियामकीय निगरानी मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था बनाने के लिए उठाया गया है। मंत्रालय ने कहा कि नए नियमों से कफ सिरप की बिक्री और वितरण अधिक जिम्मेदारी से होगा। साथ ही लाइसेंसिंग और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
सरकार ने हितधारकों से मांगे थे सुझाव
केंद्र ने पिछले साल दिसंबर में इस संबंध में मसौदा अधिसूचना जारी कर हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे। विचार-विमर्श के बाद अब संशोधित नियम लागू किए गए हैं। हाल के वर्षों में कई देशों में दूषित कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद कफ सिरप और अन्य तरल दवाओं की गुणवत्ता को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ी है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने भी निगरानी और नियंत्रण को मजबूत करने का फैसला किया है।
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