कनाडा: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी का विधेयक पेश
- सोशल मीडिया साइटों से साथ एआई चैटबॉट सेवाओं पर नकेल कसने की तैयारी.
- फिलहाल केवल ऑस्ट्रेलिया में है बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का कानून, ब्रिटेन, फ्रांस, ग्रीस, स्पेन और मलयेशिया कतार में.
एजेंसी, ओटावा। कनाडा सरकार ने डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए सेफ सोशल मीडिया एक्ट (बिल सी-34) पेश किया है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच को प्रतिबंधित करना है। बुधवार को कनाडाई पहचान और संस्कृति मंत्री मार्क मिलर द्वारा पेश किया गया यह विधेयक ऑनलाइन खतरों से निपटने के लिए सरकार की अब तक की सबसे बड़ी कानूनी कोशिश है।
यह प्रस्तावित कानून न केवल सोशल मीडिया साइटों के लिए है, बल्कि यह चैटजीपीटी जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट सेवाओं को भी विनियमित करेगा।
सरकार का मानना है कि वर्तमान में मौजूद कानून केवल नुकसान होने के बाद प्रतिक्रिया देते हैं, जबकि यह नया कानून सेवा प्रदाताओं को नुकसान होने से पहले ही जिम्मेदारी लेने के लिए बाध्य करेगा। विधेयक के तहत, सोशल मीडिया और एआई कंपनियों को अपने उत्पाद डिजाइन में बच्चों की सुरक्षा को केंद्र में रखना होगा। इस तरह का कानून फिलहाल केवल ऑस्ट्रेलिया में प्रभावी है। ब्रिटेन, फ्रांस, ग्रीस, स्पेन और मलेशिया जैसे देश ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को बेहतर बनाने के मकसद से इसी तरह के कानून लाने के क्रम में हैं या ले आए हैं।
कंपनियों के लिए जवाबदेही और जुर्माने का प्रावधान
विधेयक में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। हालांकि, यदि कंपनियां यह प्रदर्शित करने में सक्षम होती हैं कि उन्होंने बच्चों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, तो उन्हें छूट पाने का विकल्प मिलेगा। इस कानून के अनुपालन की निगरानी के लिए एक डिजिटल सुरक्षा आयोग के गठन की भी योजना है। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर 1 करोड़ कनाडाई डॉलर या उनके वैश्विक राजस्व का तीन फीसदी जुर्माना लगाया जा सकता है।
ट्रूडो ने 2021 में कानून लाने का किया था वादा
पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने 2021 के चुनाव अभियान के दौरान ऐसा कानून लाने का वादा किया था। वर्ष 2024 में एक विधेयक पेश भी किया गया था, लेकिन 2025 के चुनाव से पहले वह संसद से पारित नहीं हो सका। मंत्री मार्क मिलर ने स्वीकार किया कि पिछले संस्करणों में आपराधिक प्रावधानों को लेकर विवाद था। कंजर्वेटिव पार्टी ने पहले तर्क दिया था कि ये प्रावधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
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